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विष्णु पंथी ने किया दादा का सपना साकार

लेखक- संजीव कुमार।

विष्णु पंथी ने सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) में सर्वश्रेष्ठ निशानेबाज का मैडल जीत कर समूचे मध्य प्रदेश का नाम रोशन किया है। भोपाल के इब्राहिम गंज के रहने वाले विष्णु पंथी के दादा गुलाब चंद भगत जी का सपना था कि उनका पोता सेना में भर्ती होकर देश का नाम रोशन करें। अपने दादा के सपने को पूरा करने के लिए विष्णु पंथी ने बीएससी की डिग्री हासिल करने के बाद सेना में भर्ती होने के लिए प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारियां शुरू कर दी। भोपाल के एक कोचिंग संस्थान में अध्ययन करने के बाद विष्णु ने शारीरिक दक्षता के लिए रोज ट्रेनिंग लेना शुरू किया और जमकर पसीना बहाने के बाद प्रतियोगिता परीक्षा में लिखित परीक्षा का पास किया। पहले ही प्रयास में विष्णु का चयन सशस्त्र सीमा बल में कांस्टेबल के लिए हो गया। विष्णु को जब उत्तराखंड के चमोली जिला स्थित एसएसबी के प्रशिक्षण केंद्र ग्वालदम से बुलावा पत्र आया तो समूचे परिवार की खुशी का ठीकाना न रहा। 369 दिन तक चले सघन प्रशिक्षण के दौरान विष्णु पंथी ने सशस्त्र सीमा बल के सर्वश्रेष्ठ निशानेबाज आरक्षी के पदक को जीत कर अपने परिवार का नाम रोशन किया। उनके पिता महेश कुमार पंथी ने बताया कि 506 बच्चों में विष्णु ने निशानेबाजी में पहला स्थान प्राप्त कर समूचे परिवार और मध्य प्रदेश का नाम रोशन किया है। एक साल से ज्यादा के लंबे प्रशिक्षण के बाद जब विष्णु पंथी अपने घर लौटा तो समाज के प्रमुख लोगों ने भोपाल स्टेशन पहुंच कर उनका भव्य स्वागत किया और ढोल नगाड़ों के साथ उन्हें घर तक लेकर आए। विष्णु की मां कमलेश ने बताया कि उनका बेटा पढ़ाई में शुरू से ही अव्वल रहा। कक्षा 8 के बाद उसने सेना में भर्ती होने की तैयारियां शुरू कर दी था जिसके कारण वह दोस्तों के साथ खेलने और घूमने भी नहीं जाता था केवल अपनी पढ़ाई पर ध्यान देता था। विष्णु के पिता महेश पंथी कहते हैं कि बीएससी की पढ़ाई के बाद वह भोपाल की मौलाना आजाद लाइब्रेरी जाकर पढ़ाई करता था। पासिंग ऑउट परेड में सर्वेश्रेष्ट निशानेबाज आरक्षी का मैडल प्राप्त करने के बाद विष्णु का एसएसबी के उच्चाधिकारियों ने भी हौसला बढ़ाया। विष्णु पंथी ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान उन्हें बेहद कठिन प्रशिक्षण से गुजरना पड़ा। प्रशिक्षण में उन्हें युध्दाभ्यास, जंगल युध्द कला, सामूहिक व्यायाम और अन्य कलाओं का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। जिसके बाद वह अपने साथियों के साथ एसएसबी का आरक्षी बनने में सफल रहा। एसएसबी के जवान देश की सीमा के प्रहरी होते है और भारत की सीमा से लगे अत्यंत ऊंचे स्थानों पर जो दूसरे देशों की चौकियों के समीप होते है वहां तैनात रह कर दिनरात देश की सुरक्षा करते है। विष्णु पंथी ने बताया कि वह जीवनभर सशस्त्र सीमा बल के कर्त्तव्यों का पालन करता रहेगा और भारत माता की सुरक्षा में अपने फर्ज को अदा करेगा।

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