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7 साल बेड़ियों में जकड़ा रहा जैद हो गया ठीक

इंदौर में खजराना थाने के सामने 7 सालों तक बेड़ियों में जकड़े रहे युवक जैद अली के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। 6 महीने पहले उसकी बेड़ियाें और जंजीरों को हथोड़ी-छैनी से तोड़कर बाणगंगा मेंटल हॉस्पिटल में एडमिट किया था। वहां वह शुरुआती दौर में काफी हिंसक रहा। ट्रीटमेंट के बाद उसकी मानसिक स्थिति में काफी सुधार हुआ है। एक संस्था में डेढ़ माह तक उसकी काउंसलिंग भी की। अब वह सामान्य जीवन जीने लगा है।

इलाज के अलावा उसे सुबह से लेकर रात तक की दिनचर्या में ढाला गया। हिंसक बातों, माहौल से दूर रखा गया। मनोरंजन, संगीत, सुकून वाला माहौल दिया गया। उसकी जिंदगी में मोड़ तब आया जब एक डांस के दृश्य के दौरान उसके भी पैर थिरकने लगे।

यहीं से उसकी जिंदगी में असली बदलाव आया और गृहस्थ जीवन में ढलने लगा। मां भी जहां पहले जबरदस्त हिंसक थी अब बेटे को खुश देख डॉक्टरों और काउंसलर्स को दुआएं देती हैं।

पहले जानिए लीजिए क्या है पूरा मामला

इंदौर के 30 वर्षीय जैद को खजराना थाने के सामने खुले में मां ने 7 साल तक बेड़ियों में जकड़ कर रखा था। उसका मानसिक संतुलन ठीक नहीं था। इतने सालों में हर मौसम चाहे सर्दी हो या गर्मी या फिर बरसात, वह ऐसे ही बेड़ियों में बंधा रहा।

चौंकाने वाली बात है कि यह सब थाने से 100 मीटर की दूरी पर हो रहा था लेकिन पुलिस, समाज, राहगीर और रहवासी इसे नजरअंदाज करते रहे। सूचना मिलने के बाद इंदौर के एनजीओ ने ‘प्रवेश’ ने उस पर नजर रखी और 24 जनवरी को उसका रेस्क्यू किया था।

संस्था, पुलिस को ऐसा करना पड़ा था सामना

तब रेस्क्यू टीम और पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। उसकी मां को तब पैनिक अटैक आए थे वह काफी हिंसक हो गई थी। उसने तब खूब झूमा-झटकी, बदसलूकी और हंगामा किया था।

तब टीम ने उससे बेड़ियों की चाबी छीनी और तालों को खोलने की कोशिश की लेकिन जंग के कारण नहीं खुले थे। इसके बाद हाथ-पैर की बेड़ियों को छैनी-हथौड़े से तोड़ा गया। 2 घंटे चले रेस्क्यू के बाद युवक को छुड़ाकर इलाज के लिए मेंटल हॉस्पिटल भेजा गया था।

यह भी जानिए किन हालातों में था जैद

  • जैद को मस्जिद के बाहर एक पुराने ठेले से मां मुमताज ने बेड़ियों से बांधकर रखा था।
  • उसके आसपास प्लास्टिक की शीट बांधी गई है। सालों से उसने सिर्फ एक तौलिया लपेट रखा था।
  • मां रोज भीख मांगने जाती थी और वह रोज यहां आती थी। कभी वह उसे खाना-पीना देती है तो कभी नहीं देती। लोगों ने ये भी बताया कि युवक का मानसिक संतुलन ठीक नहीं है।
  • जैद भूख लगने पर चिल्लाता था तो कभी शांत रहता था। उसकी हालत देख कई बार ठेले वाले, राहगीर उसे फल, पानी या भोजन दे देते थे।
  • वह लोगों को पत्थर मारता था, महिलाओं को गालियां देता था।
  • जैद के दोनों पैर मोटी बेड़ियों के साथ बंधे थे। बेड़ियों का दूसरा छोर दो सिरों पर सब्बल गाड़कर उसमें दो ताले लगा दिए थे। ऐसे ही दोनों कलाइयां भी मोटी बेड़ियों के साथ बड़े ताले में जकड़ी थी। इसका छोर हाथ ठेले से बंधा हुआ था। युवक के आसपास काफी गंदगी थी, जिससे मक्खियां भिनभिना रहीं थी। वह सालों से ऐसे हालातों में था।
  • उसे छुड़ाने के बाद अस्पताल ले जाया गया तो उसके हाथ-पैर में कटी हुई बेड़ियां बंधी थी। स्टाफ ने इलाज में परेशानी का हवाला दिया तो टीम उसे बाणगंगा क्षेत्र की एक फ्रेब्रीकेशन की दुकान पर ले गई। यहां कटर से उसकी बेड़ियां काटकर अलग की गई थी।

फिर ऐसे आया धीरे-धीरे सुधार

  • बाणगंगा मेंटल हॉस्पिटल में शुरुआती दिनों में उसका वैसा ही हिंसक व्यवहार था। वह खूब चिल्लाता था। फिर कभी शांत तो कभी चिढ़ जाता था। वहां इलाज के दौरान उसमें सुधार हुआ। तीन माह वहां उसका इलाज चला और वहां से उसे 26 मार्च 2025 को संस्था प्रवेश में लाया गया।
  • प्रवेश की डायरेक्टर रूपाली जैन ने बताया कि संस्था में उसे अन्य लोगों (भिखारी जो रेस्क्यू के बाद यहां काम करने लगे हैं और अच्छे हुए हैं) के साथ शामिल किया गया।
  • यहां शाम को सामान्य खेल, योग डांस के आयोजन होते हैं। एक बार यहां सभी डांस कर रहे थे तो उनको देख वह खड़ा हुआ और डांस करने लगा। स्टेप्स को फॉलो करने लगा। काफी देर तक नाचा तो ऑब्जर्व किया कि यह पॉजिटिव साइन है। उसकी रिएक्शन शुरू होने लगी है। फिर उसे काउंसलिंग और ग्रुमिंग के माध्यम से सिखाया गया। इससे रोज उसमें और सुधार हुआ। बकौल जैन अगर कोई रिएक्शन देने लगे, सीखने लगे तो हमें भी उम्मीद नजर आई। इसके बाद जैसा उसे सिखाते गए सीखता गया।

फिर पूरी दिनचर्या ही बदल गई जैद में फर्क यह पड़ा कि सिखाने के बाद वह सुबह खुद ब्रश करने लगा और खुद नहाने लगा। खुद तेल लगाकर कंघी करने लगा और खुद खाना खाने लगा। नीचे बिखरे जूठन को उठाकर सिंक में रखने लगा। उसके बाद उसका स्किल डेवलपमेंट किया गया। वह संस्था में किसी को अगरबत्ती बनाते देखता था तो उसके पास बैठकर बारीकी से देखने लगा।

वह खुद भी अगरबत्ती, रुई की पाती बनाने लगा। ड्राइंग भी की। यहां गोबर के गणेश बनाने का काम चल रहा है, उसमें भी हाथ बंटाने लगा। उसमें सीखने की क्षमता भी खासी डेवलप हुई। यह बिल्कुल वैसा ही दौर रहा जैसे एक छोटे बच्चे को सिखाते हैं।

वैसे ही इस बच्चे (जैद) को सिखाया गया। उसे गिनती, वर्णमाला आदि सिखाई गई। दरअसल उसकी जिंदगी के 7 साल बेड़ियों में जकड़े रहे जिससे उसकी बुद्धि और समझ का विकास नहीं हुआ था। अब मां को हो गया पूरा भरोसा दूसरी ओर, जब 24 जनवरी को जैद को मेंटल हॉस्पिटल लाया गया तो उसकी मां वहां भी काफी हिंसक हुई थी और हंगामा किया था। फिर संस्था आकर भी उसने खूब हंगामा किया था। वह हर हाल में बेटे को अपने साथ ले जाने पर उतारू थी।

उसे बताया गया कि जो कुछ हो रहा है जैद की बेहतरी के लिए हो रहा है लेकिन तब वह बेकाबू थी। फिर 15 दिनों बाद उसकी भी काउंसलिंग की गई। इसके बाद उसे समझ में आया कि उनका बेटा सुरक्षित हाथों में है। जब उन्हें जैद में सुधार दिखा तो भरोसा हो गया कि उसे कोई खतरा नहीं है। वह नियमित संस्था आकर उसकी खैर खबर लेती थी।

ईद की खुशी हुई दोगुना नजदीकी रिश्तेदारों के मुताबिक जैद की बहन सारा अपनी मौसी गुलनाज बी के पास रहती है। जैद के पिता उबैर उल्ला ने उसकी मां मुमताज बी को 15 साल पहले छोड़ दिया था। जैद बचपन में सिंगर बनना चाहता था। वह बहुत अच्छा गाता था।

9 साल की उम्र में सिर पर चोट लगने के कारण उसकी मानसिक स्थिति खराब हो गई। इलाज के लिए रुपए नहीं होने से उसकी स्थिति खराब होती गई। अब वह काफी बेहतर है। पिछले दिनों मीठी ईद पर वह मां और खाला के साथ संस्था में आया और खूब खुश हुआ। उसने ईद बहुत अच्छे मनाई।

अब दिल से निकलती हैं दुआएं

21 अप्रैल को संस्था द्वारा मां मुमताज को सौंपा गया तो वह काफी खुश हुई। ‘दैनिक भास्कर’ ने उससे बात कि तो कहा कि मुझे बाद में पता चला कि सब अच्छा हो रहा है। पहले मैंने ऐसा माहौल (सुधारने वाला) देखा नहीं था। अब वह नियमित जैद को लेकर काउंसलिंग के लिए आती है।

अभी उसकी दवाइयां चल रही है। मां अब उसे लेकर स्कीम 71 में रहती है। खुद काम पर जाती है और उसका ख्याल रखती है। रिश्तेदार भी जैद का काफी ध्यान रखते हैं और उसमें सुधार देख काफी खुश हैं। जैद से सवाल करने पर उसने सारे सवालों का जवाब सामान्य तरीके से दिया। उसने आगे पढ़ने और काम करने की इच्छा जताई।

वह अभी करीबी लोगों से ज्यादा बात करता है। अभी जैद की दवाइयां चल रही हैं और परिवार डॉक्टरों व संस्था के संपर्क में है। अब मां इसके लिए डॉक्टर, काउंसलर सहित सभी को खूब दुआएं देती हैं।

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