प्रदेशभर में चर्चित रहे जीतू ठाकुर हत्याकांड में शुक्रवार को फैसला टल गया। एक आरोपित की तरफ से कोर्ट में यह कहते हुए आवेदन प्रस्तुत हुआ कि वह प्रकरण में एक गवाह को दोबारा गवाही के लिए बुलाया चाहता है। कोर्ट ने अभियोजन से इस संबंध में जवाब मांगते हुए सुनवाई आगे बढ़ा दी। अब मामले में 7 मार्च को सुनवाई होगी।
23 जनवरी 2007 को जीतू ठाकुर की महू की उपजेल में हत्या हो गई थी। आरोप है कि आरोपित युवराज उस्ताद भेष बदलकर जेल में घुसा और गोली मारकर जीतू को मौत के घाट उतार दिया। बताया जाता है कि युवराज ने पिता विष्णु उस्ताद की हत्या का बदला जीतू को मारकर लिया गया था। हत्या के कई दिन बाद युवराज ने मिल क्षेत्र की एक बस्ती में सरेंडर किया था। मामले में न्यायालय ने शुक्रवार को फैसले की तारीख तय की थी लेकिन एनवक्त पर एक आरोपित की तरफ से आवेदन प्रस्तुत हो गया कि वह इस मामले में विवेचना अधिकारी का प्रतिपरीक्षण दोबारा करना चाहता है।
हाई कोर्ट पहुंचा बसों के अधिग्रहण का मामला, शासन ने कहा स्कूलों की सहमति से अधिग्रहित की है
सांवेर तहसील में आयोजित मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के लिए स्कूल बसों के अधिग्रहण का मामला हाई कोर्ट पहुंच गया। गैर अनुदान प्राप्त सीबीएसई स्कूलों के संगठन ने अधिग्रहण को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर की है। इसमें कहा है कि प्रशासन ने स्कूलों की सहमति के बगैर दबाव बनाकर बसें अधिग्रहित की हैं। इस पर रोक लगाई जाए। शासन की तरफ से अतिरिक्त महाधिवक्ता पुष्यमित्र भार्गव ने इसका विरोध करते हुए कोर्ट को बताया कि स्कूल प्रबंधनों के साथ एक बैठक आयोजित की गई थी।
स्कूलों की तरफ से सहमति प्राप्त करने के बाद ही बसें अधिग्रहित की जा रही हैं। स्कूलों का यह रवैया गलत है कि उन्होंने पहले सहमति दे दी और अब वे इससे इंकार कर रहे हैं। सिर्फ उन्हीं स्कूलों की बसें अधिग्रहित की जा रही हैं जो सहमति दे चुके हैं। इस पर रोक लगाने की आवश्यकता नहीं है। शासन इस संबंध में विस्तृत जवाब प्रस्तुत करना चाहता है। इस पर कोर्ट ने बसों के अधिग्रहण पर रोक लगाने से इंकार करते हुए शासन को 7 मार्च तक जवाब प्रस्तुत करने को कहा है।




