नागपुर,: मध्य प्रदेश की एकमात्र प्रमाणित लघु फिल्म ‘कंबल (ब्लैंकेट)’ को नागपुर फिल्म महोत्सव 2025 में स्क्रीनिंग का गौरव प्राप्त हुआ है। यह महोत्सव नागपुर चलचित्रा फाउंडेशन और राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित किया गया और भारतीय चित्र साधना, नागपुर से प्रेरित है।
‘कंबल’, जिसे डॉ. (एच) राजेश बिजरोनिया द्वारा निर्देशित किया गया है, करुणा और दया के शक्तिशाली संदेश को सामने लाती है। यह फिल्म दर्शकों को उन जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशीलता दिखाने के लिए प्रेरित करती है, जिनके साथ हम रोज़मर्रा की जिंदगी में अनदेखा कर देते हैं। फिल्म हमें याद दिलाती है कि दयालुता का एक छोटा सा कार्य समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है।
फिल्म की कहानी:
यह लघु फिल्म ऐसे वंचित लोगों पर केंद्रित है जो सड़कों, फुटपाथों, मेट्रो स्टेशन और पुलों के नीचे अपनी जिंदगी बिताने को मजबूर हैं। फिल्म का संदेश सीधा और मार्मिक है: “ज़रूरतमंद इंसान ही इंसान होता है।” यह हर किसी में मानवता को पहचानने और दूसरों की मदद के महत्व को रेखांकित करती है।
डॉ. राजेश बिजरोनिया, जो एक फोटोग्राफर, फिल्म निर्माता और सहायक प्रोफेसर भी हैं, ने बताया, “मानवता की शक्ति को समझना और दूसरों की मदद करना हमारा नैतिक कर्तव्य है। ‘कंबल’ इसी सोच को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास है।”

इस फिल्म की कहानी और संदेश ने महोत्सव में उपस्थित दर्शकों और जूरी के सदस्यों को गहराई से प्रभावित किया। यह फिल्म न केवल समाज में जागरूकता फैलाने का काम करती है, बल्कि दूसरों के प्रति दया और करुणा के छोटे-छोटे कार्यों को बढ़ावा देने का आह्वान करती है।
नागपुर फिल्म महोत्सव का महत्व:
नागपुर फिल्म महोत्सव भारतीय सिनेमा और कला के क्षेत्र में उभरते फिल्म निर्माताओं को एक मंच प्रदान करता है। यह महोत्सव सामाजिक मुद्दों पर आधारित फिल्मों को पहचानने और प्रोत्साहित करने के लिए जाना जाता है।
‘कंबल’ का संदेश:
फिल्म का गहन संदेश है कि हम सभी को अपनी परिस्थितियों से ऊपर उठकर दूसरों की मदद करनी चाहिए। चाहे वह किसी भूखे को भोजन देना हो या किसी बेसहारे को एक कंबल, ये छोटे कदम समाज में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
मध्य प्रदेश की इस अद्भुत उपलब्धि ने राज्य को गौरवान्वित किया है और यह साबित किया है कि सिनेमा केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम भी है।
डॉ. बिजरोनिया की अपील:
डॉ. बिजरोनिया ने समाज के सभी वर्गों से अपील की कि वे जरूरतमंद लोगों की मदद करें और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा दें। “करुणा का एक छोटा कार्य किसी की जिंदगी बदल सकता है। यही ‘कंबल’ का मूल संदेश है,” उन्होंने कहा।
इस फिल्म के माध्यम से यह उम्मीद की जा रही है कि समाज में सकारात्मक बदलाव आएंगे और लोग एक-दूसरे की मदद करने के लिए प्रेरित होंगे। ‘कंबल’ न केवल फिल्म है, बल्कि एक आंदोलन है।




