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छत्‍तीसगढ़ : खाद के कोटे में 40 फीसद की कटौती, वैकल्पिक खाद से भरपाई की तैयारी

रायपुर (राज्य ब्यूरो)। छत्‍तीसगढ़ को केंद्र सरकार से मिलने वाली रासायनिक खाद में 45 फीसद की कटौती की गई है। केंद्र सरकार ने इस कमी को पूरा करने के लिए छत्‍तीसगढ़ सरकार को वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। केंद्र सरकार की कटौती से भले ही किसानों को समस्या का सामना करना पड़ा रहा हो, लेकिन प्रदेश सरकार ने महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट गोठान में बने वर्मी कंपोस्ट अब किसानों के लिए संकट मोचक का काम करेंगे।

गोठानों में तैयार वर्मी कंपोस्ट से छत्‍तीसगढ़ में वैकल्पिक खाद की भरपाई करने की तैयारी है। प्रदेश में पिछले सीजन में ही वर्मी कंपोस्ट को अनिवार्य किया गया था। इसमें एक एकड़ में एक क्विंटल वर्मी कंपोस्ट के इस्तेमाल के लिए प्रेरित किया गया। इससे न सिर्फ किसानों का उत्पादन बढ़ा, बल्कि रासायनिक खाद पर निर्भरता भी कम हुई है।

कृषि विभाग के विशेष सचिव एस भारतीदासन ने बताया कि खरीफ सीजन में प्रदेश के करीब तीन लाख किसानों को नौ लाख क्विंटल वर्मी कंपोस्ट बेच गया। प्रदेश में पंजीकृत किसान 22 लाख हैं। ऐसे में सहकारी बैंक से कर्ज लेने वाले किसानों के लिए एक एकड़ में एक क्विंटल वर्मी कंपोस्ट उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। भारतीदासन ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के गोठान से निकले वर्मी कंपोस्ट के इस्तेमाल में दस फीसद से ज्यादा रासायनिक खाद के उपयोग में कमी आई है।

उन्होंने बताया कि वर्मी कंपोस्ट का उपयोग करने वाले किसानों के खेत में प्रति एकड़ पांच कट्टा धान का उत्पादन बढ़ा है। किसानों ने बताया कि फसल में हरापन भी ज्यादा समय तक टिका रहता है। भारतीदासन ने बताया कि गोठान में पांच लाख क्विंटल खाद तैयार है। रबी की फसल के लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी गई है।

फैक्ट फाइल

  • 7 लाख 50 हजार टन रासायनिक उर्वरक की केंद्र सरकार से की गई थी डिमांड
  • 3 लाख 20 हजार टन उर्वरक ही अब तक छत्तीसगढ़ सरकार को हुआ उपलब्ध

इधर, शुरू हो गया राजनीतिक बयानों का सिलसिला

आवंटन में कटौती मोदी सरकार का किसान विरोधी चरित्र: मरकाम – प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम कहा कि जब से केंद्र में मोदी सरकार आई है, उस दिन से लेकर आज तक किसानों पर आफत ही आफत आ रही है। फसल लगाने से लेकर उपज को बेचने तक किसानों को मोदी निर्मित आप्राकृतिक आपदाओं से जूझना पड़ता है।

मरकाम ने कहा कि किसानों के नाम से घड़ियाली आंसू बहाने वाले भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डा. रमन सिंह, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय, नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक छत्तीसगढ़ के लिए मांगी गई खाद के आवंटन की कटौती पर मौन क्यों हैं? मोदी सरकार को छत्तीसगढ़ की मांग के अनुसार खाद की आपूर्ति करने के लिए कब पत्र लिखेंगे?

छत्तीसगढ़ बनने के बाद पहली बार हो रही खाद की किल्लत: कौशिक- नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि जब प्रदेश सरकार किसानों की हितैषी होने का दंभ भरते नहीं थकती, तो फिर किसानों को सुविधा देने के नाम पर केवल सियासत क्यों करती है। खाद की कमी के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है।

छत्‍तीसगढ़ में कभी भी डीएपी और यूरिया की कमी नहीं हुई, लेकिन जब से प्रदेश में कांग्रेस सरकार आई है, तब से किसानों के सामने परेशानियों के अलावा कुछ भी नहीं है। खाद नहीं मिलने के कारण किसान निजी बाजार से अधिक दाम पर खाद खरीदने को विवश हैं। देश में किसी भी राज्य की खाद की कमी नहीं है। सही समय पर खाद की डिमांड नहीं करना और खाद की उपलब्धता की जानकारी नहीं होना प्रदेश सरकार की नीति की वजह से हो रही है।

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