Tuesday, February 24, 2026
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भोपाल की आदमपुर खंती में आग पर CPCB की रिपोर्ट

भोपाल की आदमपुर कचरा खंती में आग की घटना को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रहे प्रकरण में मंगलवार को सुनवाई हुई। जिसमें सीपीसीबी (सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड) ने अपनी रिपोर्ट पेश कर दी है। कोर्ट ने 16 मई की सुनवाई में सीपीसीबी से रिपोर्ट तलब की थी। 80 पेज की रिपोर्ट में सीपीसीबी ने कोर्ट को बहुत कुछ बताया है। प्रकरण में अगली सुनवाई पांच दिन बाद संभावित है।

मामले में भोपाल के पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष सी. पांडे ने कहा कि सीपीसीबी की 80 पेज की रिपोर्ट में स्थिति ठीक नहीं बताई गई है। पानी में 100 गुना से ज्यादा आयरन मिला है। यहां का पानी न सिर्फ पीने बल्कि सब्जी और फसलों के पैदावार के लिए भी ठीक नहीं है।

बता दें कि यह मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) से जुड़ा है। पर्यावरणविद् डॉ. पांडे ने आदमपुर खंती में आग लगने की घटनाओं को लेकर एनजीटी में मार्च 2023 में याचिका दाखिल की थी। इस पर 31 जुलाई-23 को नगर निगम पर 1 करोड़ 80 लाख रुपए का जुर्माना लगाया था। एनजीटी के इस आदेश के खिलाफ निगम ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। जिस पर 16 मई-25 को सुनवाई हुई थी। इसमें निगम की ओर से जुर्माने की राशि माफ किए जाने की मांग रखी गई थी।

पर्यावरणविद् डॉ. पांडे की ओर से अभिभाषक हर्षवर्धन पांडे ने पक्ष रखा था। सुनवाई के दौरान अभिभाषक पांडे ने कोर्ट में तस्वीरें दिखाते हुए कहा था कि जिस बात के लिए निगम ने याचिका दाखिल की है, वह तो अभी भी लग रही है। पांडे ने 22 अप्रैल को आदमपुर खंती में लगी भीषण आग का उल्लेख भी किया। यह आग कई दिन में बुझी। धुआं कई किलोमीटर दूर से भी दिखाई दिया।

अर्जेंट सुनवाई में कोर्ट ने आदेश दिया डॉ. पांडे ने बताया कि 22 अप्रैल को लगी आग को लेकर मैंने सुप्रीम कोर्ट में फिर से याचिका दाखिल की थी। जिस पर 15 मई को अर्जेंट सुनवाई की गई। इसमें बताया कि यह आग 15 दिन तक लगी रही। इस कारण आसपास के कई गांव के लोग प्रभावित हुए। तक कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि नगर निगम सॉलिड वेस्ट का पालन नहीं कर रहे हैं। यदि नियमों का पालन करते तो कचरे का इतना बड़ा पहाड़ नहीं लगता। कचरे के ढेर अलग-अलग होने चाहिए थे। यदि ऐसा होता तो इतनी भीषण आग नहीं लगती।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 6 सप्ताह में सीपीसीबी जांच करके रिपोर्ट देने के आदेश दिए थे। यह रिपोर्ट 25 जुलाई को पेश होनी थी, लेकिन इस दिन सुनवाई नहीं हुई। इसलिए 5 अगस्त को रिपोर्ट पेश की गई। बुधवार को इस रिपोर्ट के बारे में पर्यावरणविद् डॉ. पांडे ने पूरी जानकारी दी।

रिपोर्ट में कहा- निगम के पास पर्याप्त संसाधन नहीं रिपोर्ट के बारे में पर्यावरणविद् डॉ. पांडे ने बताया कि कचरे की वजह से आदमपुर और आसपास के लोगों का जीवन तो नर्क हो गया है। भोपाल शहरवासी भी प्रभावित है, क्योंकि वहां की सब्जी और दूध आदि सामान भोपाल लाया जाता है। रिपोर्ट देखकर लगता है कि स्थिति बहुत खतरनाक है।

डॉ. पांडे ने बताया, आदमपुर खंती में बार-बार आग लगती है। चार बार तो बड़े स्तर पर आग लगी है। छुटपुट आग बहुत बार लगी है। इसे निगम ने एंट्री ही भी नहीं की। सीपीसीबी को यह जानकारी आसपास के लोगों ने दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 26 मई 2022 को अचानक लगने वाली आग को रोकने के लिए कड़े और स्पष्ट आदेश दिए थे। गाइडलाइन के बावजूद उनका पालन होना सामने नहीं आया है।

रिपोर्ट में आग की वजह को डिटेल में बताया गया है। ऐसी स्थिति के चलते निगम का कार्य संतोषजनक नहीं है। अभी आदमपुर खंती में 10 से 12 लाख टन कचरे का ढेर पड़ा है। नियम के अनुसार, रोज जितना कचरा आ रहा है, उतना ही खत्म भी हो। इस बात की जांच की गई।

पता चला कि भोपाल से हर रोज 850 टन कचरा निकलता है। प्रोसेसिंग के लिए 800 टन खंती पहुंचता है। इसमें से 290 टन कचरा मिट्‌टी होती है। बाकी बचा 510 टन मिक्स कचरा होता है। निगम के पास जो यूनिट है, वह 420 टन की ही क्षमता है। इससे माना गया कि पूरे कचरे की प्रोसेसिंग की क्षमता ही निगम के पास नहीं है। इससे बड़ी मात्रा में कचरा इकट्‌ठा हो रहा है। इस वजह से कचरे का ढेर बन रहा है।

रातभर सो नहीं पाए थे आसपास के ग्रामीण बता दें कि आदमपुर कचरा खंती में 22 मार्च की दोपहर में भीषण आग लग गई थी। कचरे का धुआं पड़रिया, बिलखिरिया, शांति नगर, समरधा, अर्जुन नगर, हरिपुरा व छावनी के लोगों के लिए मुसीबत बन गया, क्योंकि कई लोगों को आंखों में जलन हो रही थी। जनपद सदस्य संतोष प्रजापति ने बताया कि धुएं की वजह से रातभर सो नहीं सके थे। कई दिन तक धुआं निकलता रहा था। खंती के आसपास करीब 12 हजार आबादी रहती है।

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