भोपाल। राजधानी की रोहित हाउसिंग सोसायटी के करीब 300 सदस्य पिछले 15 वर्षों से अपने सपनों के घर और प्लॉट की रजिस्ट्री के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। मंगलवार को यह मामला एक बार फिर जनसुनवाई में उठा, जहां पीड़ितों ने कलेक्टर को आपबीती सुनाई।
लाखों जमा किए, फिर भी हाथ खाली
सदस्यों का आरोप है कि सोसायटी ने सदस्यता और विकास शुल्क के नाम पर उनसे 3.5 से 4.5 लाख रुपये तक जमा कराए। वादा किया गया था कि विकास कार्य पूरे होते ही रजिस्ट्री हो जाएगी, लेकिन आज तक उन्हें प्लॉट नहीं मिले। पीड़ित मंजू पाठक ने आरोप लगाया कि सोसायटी ने पुराने सदस्यों के नाम आवंटित प्लॉट चुपचाप दूसरों को बेच दिए।
प्रशासक के बावजूद नहीं सुलझी समस्या
सोसायटी में गड़बड़ियों के चलते सहकारिता विभाग ने 2016 में यहां सरकारी प्रशासक नियुक्त किया था, लेकिन इसके बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। कई सदस्य अब बुजुर्ग हो चुके हैं, और कुछ की तो न्याय का इंतजार करते हुए मौत भी हो गई।
कलेक्टर से गुहार
जनसुनवाई में पहुंचे सदस्यों ने मांग की है कि उपलब्ध जमीन का सीमांकन कराया जाए और वरिष्ठता सूची के आधार पर पात्र सदस्यों को प्लॉट आवंटित किए जाएं। एडीएम सुमित पांडेय ने जल्द सीमांकन का आश्वासन दिया है। गौरतलब है कि भोपाल में विभिन्न हाउसिंग सोसायटियों से जुड़े करीब 941 लोग इसी तरह की समस्याओं का सामना कर रहे हैं।




