भोपाल। अयोध्या बायपास पर बन रहे 16 किलोमीटर लंबे 10-लेन प्रोजेक्ट में सीवेज लाइन को लेकर महीनों से जारी गतिरोध आखिरकार खत्म हो गया है। मंत्री कृष्णा गौर के कड़े रुख के बाद नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और नगर निगम के बीच समन्वय बन गया है।
बैठक में तीखी बहस, मंत्री ने पूछा- ‘क्या यह भारत-पाकिस्तान का बॉर्डर है?’
प्रोजेक्ट की अड़चनों को दूर करने के लिए मंत्री कृष्णा गौर ने दोनों विभागों के अधिकारियों की बैठक बुलाई थी। बैठक के दौरान दोनों पक्ष अपनी-अपनी गलतियां मानने के बजाय एक-दूसरे पर दोषारोपण करते रहे। अधिकारियों के बीच बढ़ती बहस को देख मंत्री ने नाराजगी जाहिर की और दोटूक शब्दों में पूछा— “क्या यह भारत-पाकिस्तान का बॉर्डर है? विभाग आपस में लड़ेंगे तो जनता परेशान होगी।”
अब 3 विकल्पों पर होगा काम
शुरुआत में NHAI नियमों का हवाला देते हुए सड़क के दोनों तरफ 33 मीटर की दूरी के बाद सीवेज लाइन डालने पर अड़ा था। मंत्री के हस्तक्षेप के बाद NHAI अब सड़क के दोनों ओर 4-4 मीटर जगह देने को तैयार हो गया है। इसके लिए तीन तकनीकी विकल्प तैयार किए गए हैं, ताकि सड़क निर्माण और सीवेज लाइन का काम साथ-साथ चल सके।
क्यों जरूरी था यह फैसला?
- बर्बादी से बचाव: यदि सीवेज लाइन अभी नहीं डलती, तो भविष्य में करोड़ों की लागत से बनी नई सड़कों को फिर से खोदना पड़ता।
- 5 लाख आबादी को राहत: इस प्रोजेक्ट के अटकने से क्षेत्र के 5 लाख लोगों के घरों का सीवेज नेटवर्क प्रभावित हो रहा था।
- STP की उपयोगिता: भानपुर में बन रहा शहर का सबसे बड़ा 60 MLD का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) इसी लाइन पर निर्भर है।
अधिकारियों को नसीहत: नगर निगम ने NHAI द्वारा इस्तेमाल की गई ‘सख्त लहजे’ वाली भाषा पर भी आपत्ति दर्ज कराई थी, जिसे मंत्री ने शांत कराया। अब दोनों टीमें मिलकर काम करेंगी ताकि जनता के पैसों और समय की बर्बादी न हो।




