यूक्रेन में एमबीबीएस और पर्यटन की पढ़ाई करने के लिए शहर से गए 10 छात्र अभी तक वापस लौट आए हैं। ये छात्र यूक्रेन के कीव, लवीव, खार्किव, टर्नोपिल जैसे शहरों में फंसे हुए थे और रोमानिया, पोलैंड, हंगरी जैसे देशों के बार्डर पार कर भारतीय वायुसेना के सी-17 ग्लोबमास्टर विमानों से भारत वापस लौटकर शहर भी आ चुके हैं। इसके बावजूद दो छात्र ऐसे हैं, जिनके स्वजनों के माथों पर अब भी चिंता की लकीरें हैं। ये छात्र अलीशा खान और पीयूष सक्सेना हैं, जो यूक्रेन के सूमी शहर में फंसे हुए हैं। इन छात्रों को निकालने के लिए भारत सरकार रूस व यूक्रेन दूतावास से संपर्क कर रही हैं, लेकिन कोई हल नहीं निकल पा रहा है।
रूस के जानलेवा हमलों के बीच यूक्रेन के सूमी शहर में ग्वालियर के दो विद्यार्थियों सहित 500 से अधिक भारतीय छात्र फंसे हुए हैं। ग्वालियर की अलीशा खान और पीयूष सक्सेना वहां मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए गए थे, लेकिन युद्ध के कारण उन्हें पिछले 11 दिनों से बंकरों में छुपकर रहना पड़ रहा है। इन छात्रों के पास मौजूद खाने-पीने का सामान खत्म हो चुका है, लेकिन युद्ध क्षेत्र से निकलने की आस में वे दिन गुजार रहे हैं। सूमी में फंसी अलीशा ने बताया कि बंकरों में पानी खत्म होने के कारण गत शुक्रवार-शनिवार को इन छात्रों को बर्फ पिघलाकर इस्तेमाल करनी पड़ी, लेकिन रविवार को सूमी मेडिकल यूनिवर्सिटी ने छात्रों के लिए पानी के टैंकरों का इंतजाम कराया है। इसके अलावा छात्रों के लिए खाद्य सामग्री की व्यवस्था भी की गई है। इन छात्रों के पास वहां से निकलने का सिर्फ एक ही रास्ता है कि उन्हें रूस की सीमा में प्रवेश मिले। हालांकि ग्वालियर से यूक्रेन पढ़ने गए अधिकतर छात्र पोलैंड, रोमानिया और हंगरी बार्डर पार कर भारत वापस आ चुके हैं, लेकिन सूमी में फंसे छात्रों के लिए ये बार्डर 600 से 800 किमी दूर हैं।
-ये छात्र अभी तक लौटे वापस-
ग्वालियर के पवन सोलंकी, पुखराज सिंह, शिवम श्रीवास्तव, रवि कुमार, काकुल जाट, हर्षाली राजे, निखिल कुरेचया, प्रतीक चौधरी, सत्यम शर्मा, रोहन गुप्ता अभी तक वापस लौट आए हैं।




