भोपाल। कटारा हिल्स क्षेत्र में रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की बहू ट्विशा शर्मा की संदिग्ध आत्महत्या का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। गुरुवार को मृतका के परिजनों ने महिला थाने पहुंचकर जमकर हंगामा किया और पुलिस पर जांच में ढिलाई बरतने के गंभीर आरोप लगाए। परिजनों का कहना है कि आरोपी पक्ष के रसूख के कारण पुलिस ठोस कार्रवाई करने से बच रही है।
परिजनों के गंभीर आरोप: ‘सबूत मिटा रहा है पति’
ट्विशा की बहन प्रियंका और भाई मेजर हर्षित शर्मा ने आरोप लगाया कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि हत्या है। उनका दावा है कि ट्विशा के शरीर पर चोट के निशान मिले हैं। बहन प्रियंका ने सवाल उठाया कि मौत की पुष्टि होने के बाद पति समर्थ सिंह एक घंटे तक कहां गायब था? परिजनों का आरोप है कि इस दौरान घर में साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की गई। उन्होंने पुलिस पर बदसलूकी का आरोप लगाते हुए कहा कि न्याय मांगने पर उनके लिए थाने के दरवाजे बंद कर दिए गए।
विवाद की जड़: नौकरी छोड़ने पर मिलते थे ताने
मेजर हर्षित के अनुसार, शादी के एक साल बाद ही ट्विशा को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा था। नौकरी छोड़ने के बाद ससुराल पक्ष उसे ‘नाकारा’ कहकर ताने देता था। मौत से कुछ देर पहले ट्विशा ने भाई को फोन कर बताया था कि वह प्रताड़ना से तंग आ चुकी है और नोएडा वापस आना चाहती है। उसने घर लौटने के लिए टिकट भी बुक करा लिया था।
ससुराल पक्ष का दावा: ‘मानसिक रूप से बीमार थी ट्विशा’
दूसरी ओर, पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने आरोपों को नकारते हुए कहा कि ट्विशा का मनोवैज्ञानिक इलाज चल रहा था। उनके मुताबिक, घटना वाली रात परिवार साथ में टीवी देख रहा था और ट्विशा ने छत पर जाकर जिम रबर के सहारे आत्महत्या कर ली। उन्होंने ट्विशा पर नशा करने के भी दावे किए हैं, जिसे मायके पक्ष ने उसे बदनाम करने की साजिश बताया है।
जांच की स्थिति: एसीपी को सौंपी गई डायरी
मामले की गंभीरता को देखते हुए कटारा हिल्स थाना प्रभारी सुनील दुबे ने बताया कि केस डायरी एसीपी को सौंप दी गई है। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच राजपत्रित अधिकारी (ACP) स्तर पर होगी। पुलिस का कहना है कि शॉर्ट पीएम रिपोर्ट में मौत का कारण फांसी बताया गया है और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
मुख्य बिंदु:
- मृतका: ट्विशा शर्मा (31 वर्ष), नोएडा की रहने वाली।
- पति: समर्थ सिंह, भोपाल के वकील और पूर्व जज के पुत्र।
- आरोप: मानसिक प्रताड़ना, हत्या और सबूत मिटाना।
- पुलिस का पक्ष: निष्पक्ष जांच का आश्वासन, बदसलूकी के आरोपों से इनकार।



