भोपाल। देश विरोधी और आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त प्रतिबंधित संगठन पीएफआई (PFI) के नौ सदस्यों की जमानत याचिका विशेष अदालत (NIA) ने खारिज कर दी है। विशेष न्यायाधीश डॉ. मुकेश मलिक की अदालत ने यह फैसला सुनाते हुए आरोपियों को राहत देने से इनकार कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
वर्ष 2022 में अब्दुल करीम बैकरीवाला और उसके 21 साथियों के खिलाफ एटीएस (ATS) ने मामला दर्ज किया था। आरोप है कि ये सभी आरोपी मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों में पीएफआई के पदाधिकारी बनकर भारत सरकार के खिलाफ साजिश रच रहे थे। इनके पास से ऐसे दस्तावेज मिले थे, जिनमें वर्ष 2047 तक भारत में इस्लामिक शासन स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया था। साथ ही, युवाओं को घातक हमले करने की ट्रेनिंग देने के भी गंभीर आरोप हैं।
सरकारी पक्ष की मजबूत दलील
अदालत में विशेष लोक अभियोजक विक्रम सिंह और मनोज त्रिपाठी ने कड़ी पैरवी की। उन्होंने कोर्ट को बताया कि आरोपियों द्वारा किया गया अपराध अत्यंत गंभीर है और इसमें ‘जमानत अपवाद’ (Bail is exception, Jail is rule) का सिद्धांत लागू होता है। सरकारी वकीलों ने तर्क दिया कि आरोपियों के पास से आपत्तिजनक दस्तावेज और ‘विजन 2047’ का खाका मिला है, जो सीधे तौर पर देश की सुरक्षा को चुनौती है।
इन्हें नहीं मिली राहत
अदालत ने अनवर खान, ख्वाजा हुसैन, मोहम्मद शमशाद, इमरान हुसैन, आबिद खान, इशांक खान, मोहम्मद युसूफ मौलानी, मोहसिन कुरैशी और नासिर नंदवी की जमानत अर्जी खारिज करते हुए जेल में ही रहने का आदेश दिया है।




