देवास: इंदौर-देवास पश्चिमी रिंग रोड प्रोजेक्ट के लिए हो रहे भूमि अधिग्रहण के विरोध में सोमवार को किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। जमीन के बदले चार गुना मुआवजे की मांग को लेकर किसानों ने ट्रैक्टरों के साथ भोपाल कूच का ऐलान किया था। हालांकि, प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए किसानों को शिप्रा चौराहे पर ही रोक दिया।

बरलाई जागीर में तनाव और प्रदर्शन:
तय योजना के मुताबिक जब किसान आगे बढ़ने लगे तो समीपस्थ गांव बरलाई जागीर में प्रशासन और किसानों के बीच तीखी तनाव की स्थिति बन गई। किसानों को रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन (पानी की बौछार) का इस्तेमाल किया। इसके बाद आक्रोशित किसान वहीं धरने पर बैठ गए और अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन शुरू कर दिया। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है।
क्यों हो रहा है विरोध? मुख्य मांगें:
- चार गुना मुआवजा: किसान भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के तहत जमीन के बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं।
- उपजाऊ जमीन का बचाव: किसानों का कहना है कि इस हाईवे के कारण मालवा क्षेत्र की बेहद उपजाऊ, सिंचित और बहु-फसली कृषि भूमि नष्ट हो रही है।
- लैंड पूलिंग का विरोध: ग्रामीण इलाकों में प्रशासन की जबरन जमीन अधिग्रहण की नीति का किसान कड़ा विरोध कर रहे हैं।
- आंदोलन जारी रहेगा: किसानों ने साफ कर दिया है कि जब तक उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिलता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
क्या है रिंग रोड प्रोजेक्ट?
इंदौर-देवास वेस्टर्न रिंग रोड एक बड़ा आउटर हाईवे प्रोजेक्ट है। इसका मुख्य उद्देश्य भारी वाहनों को देवास, सांवेर और इंदौर शहरों के अंदर प्रवेश किए बिना सीधे बाहर से निकालना है। इस प्रोजेक्ट से सांवेर, देपालपुर और इंदौर के करीब 39 गांव प्रभावित हो रहे हैं। इस रिंग रोड को 2028 के उज्जैन सिंहस्थ कुंभ मेले के दौरान ट्रैफिक को सुचारू रूप से संभालने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।




