सतना: शहर में नगर निगम की पेयजल व्यवस्था एक बार फिर चरमरा गई है। भरहुत नगर, धवारी और आसपास के इलाकों में नलों से कीड़ों युक्त दूषित पानी आने से नागरिकों में रोष और चिंता का माहौल है।
मुख्य बिंदु:
- बीमारियों का खतरा: गंदे पानी की आपूर्ति से डायरिया, पीलिया और टाइफाइड जैसी जलजनित बीमारियों का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
- निजी बोरिंग वालों को राहत, बाकी परेशान: जिन घरों में निजी बोरवेल नहीं हैं, वे पूरी तरह निगम की जलापूर्ति पर निर्भर हैं और मजबूरी में बाजार से पानी खरीदने को विवश हैं।
- स्काडा (SCADA) प्रोजेक्ट पर उठे सवाल: करोड़ों रुपये की लागत वाले स्काडा प्रोजेक्ट के बाद भी जनता को साफ पानी नहीं मिलने से लोगों में अधिकारियों और ठेकेदारों के प्रति भारी नाराजगी है।
जिम्मेदार पक्ष के बयान:
- पार्षद का आरोप: स्थानीय पार्षद पंकज कुशवाहा का कहना है कि वे पिछले एक साल से इस समस्या की शिकायत निगम आयुक्त और महापौर से कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है।
- महापौर का दावा: महापौर योगेश ताम्रकार ने बताया कि एनीकेट में पानी की कमी और फिल्टर प्लांट की समस्या के चलते यह स्थिति बनी थी। अब बाणसागर का पानी पहुंच चुका है और एक-दो दिन में जलापूर्ति पूरी तरह सुचारू कर दी जाएगी।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह:
नागरिकों से अपील की गई है कि वे फिलहाल पानी उबालकर या फिल्टर करके ही पिएं। अत्यधिक दूषित पानी मिलने पर तुरंत इसकी सूचना नगर निगम को दें।




