भोपाल। कहते हैं कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं, लेकिन निशातपुरा थाने की पुलिस ने साबित कर दिया है कि उनके हाथ इतने भी लंबे नहीं हैं कि शिफ्ट खत्म होने के बाद एक कागज की एप्लीकेशन पकड़ सकें। भले ही इलाके से कोई ढाई किलोमीटर लंबी केबल लपेट कर ले जाए, लेकिन मजाल है कि थाने का स्टाफ अपनी ड्यूटी के टाइम से एक मिनट भी ऊपर काम कर ले।
चोरों का ओवरटाइम, पुलिस का टाइम ओवर
किस्सा बड़ा ही दिलचस्प है। सूत्र बताते हैं कि रेड टीवी नेटवर्क की करीब 2 से ढाई किलोमीटर लंबी केबल चोरी हो गई। मतलब सोचिए, चोरों ने बाकायदा पसीना बहाकर, ओवरटाइम करके इतनी लंबी केबल पार की होगी। इसी चोरी की शिकायत लेकर रेट इंडिया न्यूज़ के संवाददाता आदिल खान निशातपुरा थाने पहुंच गए। उन्हें लगा होगा कि चलो पत्रकार हैं, थोड़ा रौब पड़ेगा और काम जल्दी हो जाएगा। लेकिन उन्हें क्या पता था कि पुलिस के आगे लोकतंत्र का चौथा स्तंभ भी वेटिंग लिस्ट में ही खड़ा रहता है।
थाने में खेला गया पास-पास
आदिल का आरोप है कि पुलिस वालों ने पहले आदिल खान को नियम-कानून का पाठ पढ़ाया और फरमान सुनाया- जाओ, बाकायदा एप्लीकेशन लिखकर लाओ। आदिल भाई भी ठहरे रिपोर्टर, फटाफट एप्लीकेशन लिखवा कर ले आए। लेकिन असली खेल तो अब शुरू होना था। थाने में मौजूद स्टाफ ने एप्लीकेशन देखते ही एक-दूसरे पर काम टालना शुरू कर दिया। अरे शर्मा जी आप ले लो, नहीं वर्मा जी आप देख लो की तर्ज पर पत्रकार महोदय को करीब 45 मिनट थाने की कुर्सी पर इंतजार कराया गया।
हमारी तो शिफ्ट खत्म
इंतजार करने के बाद जब रिपोर्टर के सब्र का बांध टूटा और उन्होंने गुजारिश की कि हुजूर, कम से कम एप्लीकेशन पर एक रिसीविंग का ठप्पा ही लगा दो, तो पुलिस ने अपना सबसे बड़ा हथियार निकाल लिया। जवाब मिला- अरे भाई, हमारी तो ड्यूटी का टाइम खत्म हो गया, अब हम एप्लीकेशन नहीं ले सकते। आम आदमी का क्या होगा कालिया?
गजब का टाइम मैनेजमेंट है…
मतलब शिकायतकर्ता सामने खड़ा है, हाथ में कागज है, लेकिन साहब की शिफ्ट खत्म हो गई है तो वह एक पेन तक नहीं उठाएंगे। अब सोचने वाली बात यह है कि जब पुलिस वाले मीडिया वालों को ही थाने में बैठा-बैठा कर इतना बोर कर देते हैं, तो बेचारी आम जनता का क्या हाल करते होंगे?
लगता है निशातपुरा थाने में अब शिकायत दर्ज कराने के लिए भी रेलवे की तरह तत्काल टिकट कटवाना पड़ेगा, ताकि साहब लोगों की शिफ्ट खत्म होने से पहले नंबर आ सके।



