भोपाल: टीबी मरीजों को घर-घर जाकर दवा खिलाने, उनका फॉलोअप कराने और परिवार के सदस्यों की जांच सुनिश्चित करने वाले डॉट्स प्रोवाइडर्स इन दिनों गंभीर आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। स्थिति यह है कि किसी को 10 महीने तो किसी को मार्च 2025 से मानदेय (प्रोत्साहन राशि) नहीं मिला है।
बजट न होने का हवाला देकर अधिकारियों द्वारा केवल आश्वासन दिया जा रहा है। समय पर भुगतान न मिलने के कारण इन स्वास्थ्य कर्मियों के लिए बच्चों की स्कूल फीस भरना, घर का किराया देना और रोजमर्रा का खर्च चलाना तक मुश्किल हो गया है। कई डॉट्स प्रोवाइडर्स उधारी मांगकर अपना घर चला रहे हैं।
छात्रों और कमजोर वर्ग के लोगों की बढ़ी परेशानी
भोपाल के कई क्षेत्रों में आर्थिक स्थिति कमजोर होने या पढ़ाई के साथ परिवार संभालने के लिए युवाओं और महिलाओं ने यह काम शुरू किया था। अशोक गार्डन, कोलार और अन्य इलाकों से जुड़े डॉट्स प्रोवाइडर्स का कहना है कि वे लगातार गर्मी और बारिश में भी मरीजों तक दवा और बलगम के नमूने पहुंचाने का काम पूरी निष्ठा से कर रहे हैं, लेकिन मेहनताना न मिलने से वे मानसिक और आर्थिक रूप से टूट रहे हैं।
राज्य क्षय अधिकारी को सौंपा पत्र
लंबे समय से भुगतान न होने से परेशान डॉट्स प्रोवाइडर्स ने गत 3 अगस्त को राज्य क्षय अधिकारी (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मध्यप्रदेश) को पत्र लिखकर अपनी 10 से 11 महीने की लंबित प्रोत्साहन राशि का शीघ्र भुगतान करने की मांग की है।



