भोपाल। रेलवे के वातानुकूलित कमरों में बैठे अधिकारी बिना जमीनी हकीकत जाने कैसे फरमान जारी करते हैं, इसका एक जीता-जागता और हैरान करने वाला उदाहरण भोपाल रेल मंडल में देखने को मिला है। रेलवे के जिम्मेदारों ने प्लेटफॉर्म पर वेंडिंग करने वालों की संख्या तो बढ़ा दी, लेकिन इस नई सूची में एक ऐसे स्टॉल को भी धड़ल्ले से मंजूरी दे दी गई है जो पिछले दो महीने से ज्यादा समय से बंद पड़ा है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या भोपाल रेलवे स्टेशन पर अब हवा में दुकानें चल रही हैं? या फिर बंद दुकानों की आड़ में किसी बड़े खेल की तैयारी है?
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, 14 अगस्त 2026 को भोपाल रेल मंडल के वाणिज्य विभाग की ओर से इटारसी और भोपाल स्टेशन पर प्लेटफॉर्म वेंडिंग नीति में संशोधन के संबंध में एक आदेश जारी किया गया है। यह आदेश एसीएम (वाणिज्य) वासुदेव सरकार के डिजिटल हस्ताक्षर से जारी हुआ है। इस नए आदेश के मुताबिक, पूर्व में जो वेंडर्स की संख्या 5 निर्धारित थी, उसे तत्काल प्रभाव से बढ़ाकर 8 वेंडर्स प्रति स्टॉल कर दिया गया है।
बंद स्टॉल पर मेहरबानी, एसीएम साहब की कार्यप्रणाली पर सवाल
नीति में बदलाव करना रेलवे का अधिकार है, लेकिन असली खेल इस आदेश की सूची में छुपा है। एसीएम वासुदेव सरकार द्वारा जारी सूची में सीरियल नंबर 14 पर भोपाल स्टेशन के मैसर्स ताज एंटरप्राइजेज (M/s Taj Enterprises – CS-07) का नाम भी शान से शामिल है। सूची के अनुसार, इन्हें भी 8 वेंडर्स रखने की आधिकारिक अनुमति दे दी गई है।
लेकिन स्टेशन की जमीनी हकीकत यह है कि मैसर्स ताज एंटरप्राइजेज का यह स्टॉल पिछले लगभग दो महीने से भी ज्यादा वक्त से बंद पड़ा है। वहां से किसी भी प्रकार की कोई बिक्री नहीं हो रही है।

- बिना निरीक्षण कैसे किए हस्ताक्षर? एसीएम वाणिज्य वासुदेव सरकार ने क्या बिना किसी भौतिक सत्यापन या फील्ड रिपोर्ट के ही इस सूची पर अपने डिजिटल हस्ताक्षर कर दिए?
- क्या अधिकारियों को स्टेशन की खबर नहीं? क्या भोपाल रेल मंडल के वाणिज्य अधिकारियों और स्टेशन प्रबंधकों को इतनी भी जानकारी नहीं है कि उनके अपने स्टेशन पर वर्तमान में कौन सा स्टॉल संचालित है और कौन सा महीनों से बंद है?
- बंद दुकान के 8 वेंडर्स कौन होंगे? जब स्टॉल ही मौजूद नहीं है, तो उसके नाम पर 8 वेंडर्स के पास कैसे बनेंगे? क्या बंद पड़े स्टॉल की आड़ में प्लेटफॉर्म पर बाहरी लोगों को अवैध रूप से एंट्री देने का रास्ता साफ किया जा रहा है?
यह मामला सीधे तौर पर भोपाल रेल मंडल की मॉनिटरिंग और अंधेरगर्दी की पोल खोलता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस गंभीर लापरवाही के उजागर होने के बाद डीआरएम और रेलवे के उच्च अधिकारी क्या संज्ञान लेते हैं। क्या एसीएम वासुदेव सरकार से इस लापरवाही पर जवाब-तलब किया जाएगा या फिर बंद स्टॉल के नाम पर जारी यह कागजी खेल ऐसे ही चलता रहेगा?




