भोपाल। अटल आवास योजना में फ्लैट दिलाने के नाम पर गिरफ्तार हुई प्रमिला तिवारी के कारनामे एक-एक कर सामने आ रहे हैं। पुलिस जांच में पता चला है कि प्रमिला और उसका गिरोह केवल फ्लैट ही नहीं, बल्कि वन विभाग, रेलवे, एसबीआई, पीडब्ल्यूडी और एम्स जैसे बड़े सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर युवाओं से लाखों रुपए ठगता था।
सरकारी दफ्तरों के बाहर रची जाती थी साजिश
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह बेरोजगार युवाओं का भरोसा जीतने के लिए उन्हें सरकारी दफ्तरों के बाहर बुलाता था। वहां पहले से ही गिरोह के सदस्य मौजूद रहते थे, जो खुद को सरकारी कर्मचारी बताकर विश्वास दिलाते थे। जालसाजों ने कई युवाओं को फर्जी नियुक्ति पत्र सौंपे, जिनमें उच्च अधिकारियों और मंत्रियों के जाली हस्ताक्षर तक थे। नवीन सौंधिया, राकेश दुबे की बेटी, हिमांशु, प्रियांशु और राधा सहित कई अन्य लोग इस ठगी का शिकार हुए हैं।
धोखाधड़ी का तरीका बेहद शातिर
ठगों की चालाकी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इन्होंने कुछ युवाओं को नगर निगम में नौकरी का झांसा देकर डेढ़ महीने तक सर्वे का काम भी कराया, ताकि किसी को शक न हो। प्रमिला के पास युवाओं का डेटा मौजूद था, जिसके जरिए वह उन्हें निशाना बनाती थी।
कैसे हुई गिरफ्तारी?
मामला तब खुला जब कोटरा सुल्तानाबाद निवासी प्रतीक सोनी ने शिकायत की कि प्रमिला ने उन्हें अटल आवास योजना में फ्लैट दिलाने के नाम पर 1.80 लाख रुपए ठग लिए और फर्जी रसीदें थमा दीं। इस शिकायत पर टीटी नगर पुलिस ने 18 जून को प्रमिला को गिरफ्तार किया। आरोपी महिला पहले भी चर्चाओं में रही है।
पुलिस की अपील:
टीटी नगर पुलिस ने इस गिरोह के बाकी सदस्यों की तलाश तेज कर दी है। पुलिस ने अन्य पीड़ितों से भी आगे आकर शिकायत दर्ज कराने की अपील की है ताकि इस जालसाज नेटवर्क का पूरी तरह पर्दाफाश किया जा सके।




