भोपाल: शहर के गैस प्रभावित इलाकों में नगर निगम की पानी सप्लाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में हुई जांच में बड़े तालाब से सप्लाई होने वाले 90 फीसदी सैंपल फेल हो गए हैं, जिनमें खतरनाक फीकल कॉलीफॉर्म बैक्टीरिया (सीवेज और मल की मौजूदगी) पाया गया है।
मुख्य बिंदु:
- सैंपलों की स्थिति: कुल 63 सैंपल लिए गए, जिनमें से 43 (68%) में फीकल कॉलीफॉर्म मिला। बड़े तालाब के 42 में से 38 (90%) और कोलार सप्लाई के 16 में से 4 (25%) सैंपल पॉजिटिव पाए गए। राहत की बात यह है कि नर्मदा के सभी 4 सैंपल सुरक्षित मिले।
- गंभीर बीमारियों का खतरा: यूका कारखाने के आसपास और करीब 30 बस्तियों की एक लाख आबादी पर टायफाइड, पीलिया और उल्टी-दस्त जैसी जलजनित बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है।
- जमीनी हकीकत: मीडिया पड़ताल में सामने आया कि कई कॉलोनियों (जैसे नवाब कॉलोनी, ब्लू मून कॉलोनी और शिवशक्ति नगर) में पेयजल की पाइपलाइनें खुली नालियों और सीवेज के बीच से गुजर रही हैं, जिनमें लीकेज के कारण घरों तक गंदा पानी पहुंच रहा है।
- जिम्मेदारों के तर्क: गैस पीड़ित संगठनों ने 2018 के हलफनामे का हवाला देकर निगम अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। वहीं, नगर निगम के अधीक्षण यंत्री (जलकार्य) उदित गर्ग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि निगम ने इस साल 27 हजार से अधिक सैंपल लिए हैं और कहीं भी फीकल कॉलीफॉर्म की पुष्टि नहीं हुई है।




