भोपाल। मध्यप्रदेश में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद पार्टी ने राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान किया था, लेकिन भोपाल में इसकी हवा निकलती दिखी। सोमवार को भाजपा कार्यालय घेराव के बड़े दावे के बीच प्रदेश कांग्रेस कार्यालय (PCC) के बाहर महज 7 युवा कांग्रेसी ही प्रदर्शन के लिए जुटे।
असरहीन रहा संगठन का निर्देश
प्रदेश संगठन प्रभारी डॉ. संजय कामले ने 12 जून को पत्र जारी कर 15-17 जून तक उग्र प्रदर्शन के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद भोपाल में युवा कांग्रेस कार्यकर्ता भाजपा कार्यालय तक पहुंचने की हिम्मत नहीं जुटा सके। पीसीसी के बाहर ही इन सात कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ नारेबाजी की और पुतला फूँककर रस्म अदायगी पूरी कर ली।

पुलिस रही बेफिक्र
हालात यह थे कि प्रदर्शनकारियों से ज्यादा संख्या वहां तैनात पुलिसकर्मियों की थी। कार्यकर्ताओं की संख्या इतनी कम थी कि पुलिस ने उन्हें रोकने या पुतला छीनने की जहमत तक नहीं उठाई।
कागजों पर बड़ी हुंकार
सड़क पर कार्यकर्ताओं का टोटा दिखा, लेकिन मीडिया विज्ञप्ति में भोपाल युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अमित खत्री ने इसे ‘तानाशाही के खिलाफ बड़ा संघर्ष’ करार दिया। उन्होंने निर्वाचन आयोग को सत्ताधारी दल का राजनीतिक औजार बताते हुए लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाया और आगे भी संघर्ष जारी रखने की चेतावनी दी है।




