Friday, June 26, 2026
28.5 C
Bhopal

फिल्म ‘हक’ की रिलीज पर रोक की मांग खारिज

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने शाहबानो बेगम की बेटी सिद्दिका बेगम खान की वह याचिका खारिज कर दी है, जिसमें उन्होंने फिल्म ‘हक’ की रिलीज रोकने की मांग की थी। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा-“किसी व्यक्ति का निजता और प्रतिष्ठा का अधिकार उसकी मृत्यु के साथ समाप्त हो जाता है। इन्हें वारिस नहीं पा सकते।’ गुरुवार को अपने फैसले में जस्टिस प्रणय वर्मा ने कहा- ‘जब कोई व्यक्ति जीवित नहीं रहता, तो उसकी प्राइवेसी और प्रतिष्ठा का अधिकार भी समाप्त हो जाता है। फिल्म ‘हक’ पर विवाद क्यों फिल्म ‘हक’ जिसमें यामी गौतम धर और इमरान हाशमी मुख्य भूमि भूमिकाओं में हैं, शाहबानो के जीवन और उनकी कानूनी लड़ाई से प्रेरित बताई जा रही है। निर्माताओं ने कोर्ट में कहा कि फिल्म कोई “बायोपिक’ नहीं बल्कि अंग्रेजी किताब “बानोः भारत की बेटी’ पर आधारित एक काल्पनिक रूपांतरण है। फिल्म 7 नवंबर को रिलीज हो रही है।

निर्माता की दलील- फिल्म काल्पनिक कथा पर आधारित फिल्म निर्माता जंगली पिक्चर्स के अधिवक्ता ऋतिक गुप्ता और अजय बगड़िया ने कहा- हमने अदालत में दलील दी थी कि फिल्म एक काल्पनिक कथा पर आधारित है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। अदालत ने हमारे तर्कों से सहमति जताते हुए याचिका को खारिज कर दिया है।

कहा- फिल्म के डायलॉग खराब और आपत्तिजनक 4 नवंबर को हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता सिद्दीका बेगम की ओर से एडवोकेट तौसीफ वारसी, जंगली पिक्चर की ओर से सीनियर एडवोकेट अजय बागडिया, इंसोमनिया मीडिया एंड कंटेट सर्विसेज लिमिटेड की तरफ से हितेश मेहता और मिनिस्ट्री ऑफ ब्रॉडकास्ट की ओर से एडवोकेट रोमेश दवे उपस्थित हुए थे।

एडवोकेट तौसीफ वारसी ने तर्क रखते हुए कहा था- फिल्म के टीजर और ट्रेलर में कुछ ईवेंट्स ऐसे दिखाए हैं, जो मेरी मुवक्किल की मां की प्रतिष्ठा, सम्मान को धूमिल करते हैं। इसमें डायलॉग के कुछ वर्जन खराब और आपत्तिजनक हैं। वास्तविक जिंदगी में उनके माता-पिता के बीच ऐसे संवाद कभी नहीं रहे।

एक तरफ तो फिल्म के निर्माता कहते हैं कि शाहबानो बेगम ने संघर्ष किया था। खासकर महिला होकर, जबकि उस समय महिला सशक्तिकरण इतना मजबूत नहीं था, जितना आज है। शाहबानो ने पति से अधिकार की लड़ाई लड़ी। धर्म के पहलू का ध्यान रखा और कोर्ट से खुद का अधिकार हासिल किया।

दूसरी तरफ फिल्म के डायलॉग परिवार की प्रतिष्ठा को धूमिल करते हैं, वह भी तब जब शाहबानो इस दुनिया में नहीं हैं।

याचिका में कहा- तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया एडवोकेट वारसी ने कहा था कि यह फिल्म शाहबानो के जीवन और 1970 के दशक में महिलाओं के अधिकारों को लेकर चले ऐतिहासिक मुकदमे पर आधारित है, लेकिन इसमें बिना अनुमति और तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है।

शाहबानो की बेटी की याचिका में ये भी कहा गया था कि फिल्म स्वर्गीय शाहबानो बेगम की निजी जीवन को दर्शाती है, जिसमें उनके परिवार से जुड़े कई संवेदनशील घटनाक्रम, पर्सनल एक्सपीरियंस और सामाजिक परिस्थितियां शामिल हैं।

वकील ने कहा था कि उनकी मुवक्किल सिद्दिका के पास अपनी मां शाहबानो के जिंदगी के मोरल और लीगल अधिकार सुरक्षित हैं।

फिल्म निर्माता की दलील- प्रतिष्ठा धूमिल करने जैसी बात नहीं

कोर्ट में जंगली पिक्चर की ओर से सीनियर एडवोकेट अजय बागड़िया और इंसोमनिया मीडिया एंड कंटेंट सर्विसेज लिमिटेड की ओर से हितेश मेहता ने तर्क रखे थे कि फिल्म के डायलॉग में कुछ आपत्तिजनक नहीं है। न ही परिवार की प्रतिष्ठा को धूमिल करने जैसी बात है। ईवेंट्स अच्छे नजरिए और बेहतर तरीके से फिल्माया है।

Hot this week

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व: सांभर को पोहा खिलाना पड़ा भारी, असिस्टेंट डायरेक्टर निलंबित

​भोपाल/पिपरिया। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (STR) के प्रभारी सहायक संचालक...

भोपाल: जिला बदर घोषित बदमाश गांधीनगर पुलिस के हत्थे चढ़ा

​भोपाल। गांधीनगर थाना पुलिस ने जिला बदर घोषित एक...

Topics

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व: सांभर को पोहा खिलाना पड़ा भारी, असिस्टेंट डायरेक्टर निलंबित

​भोपाल/पिपरिया। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (STR) के प्रभारी सहायक संचालक...

भोपाल: जिला बदर घोषित बदमाश गांधीनगर पुलिस के हत्थे चढ़ा

​भोपाल। गांधीनगर थाना पुलिस ने जिला बदर घोषित एक...

सिरोंज: इलाज के बहाने छात्रा से छेड़छाड़, भाजपा नेता व डॉक्टर पर केस दर्ज

​सिरोंज। विदिशा जिले के सिरोंज में एक निजी अस्पताल...
spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img