भोपाल | राजधानी के निशातपुरा इलाके में लगता है कि कानून का खौफ खत्म और रसूख का राज शुरू हो चुका है। न्यू जेल रोड स्थित कमलेश नगर में एक पेट्रोल पंप संचालक की गुंडागर्दी और पुलिस की संदिग्ध भूमिका ने एक पूरे परिवार को आत्महत्या की कगार पर धकेल दिया है। पीड़ित ने एक दर्दनाक वीडियो जारी कर पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जानकारी के मुताबिक, रवि शंकर त्रिगुणायत और उनके भाई गौतम त्रिगुणायत क्षेत्र के निवासी हैं। पड़ोस में रहने वाले पेट्रोल पंप संचालक कमल पाल पर आरोप है कि वे नशे की हालत में गौतम के साथ अभद्रता और गाली-गलौज कर रहे थे। जब रवि की पत्नी ने इस व्यवहार का विरोध किया, तो मामला और बिगड़ गया। प्रत्यक्षदर्शियों और सूत्रों के अनुसार, विरोध से आगबबूला होकर कमल पाल ने कथित तौर पर तीन-चार अन्य युवकों को बुला लिया। इन लोगों ने त्रिगुणायत परिवार के साथ जमकर मारपीट की। हमले की क्रूरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आरोपियों ने घर की एक युवती के सिर पर भी डंडे से वार किया, जिससे वह लहूलुहान हो गई।

फरियादी की आपबीती: सर फटा, खून बहा, पर साहब बोले- तुम ही दोषी हो
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में बदहवास दिख रहे पीड़ित रवि शंकर त्रिगुणायत ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कमल पाल ने फोन पर हमारे रवि शंकर साहू जी को जान से मारने की धमकी दी। जब हमने विरोध किया तो उसने गुंडे बुलाकर हमला कर दिया। मेरी छोटी बहन (भतीजी) का सिर डंडे मारकर फाड़ दिया। मेरे भाई का हाथ छूरी से कट गया, खून बह रहा था, लेकिन जब हम थाने पहुंचे तो सीएसपी साहब कहते हैं कि तुमने खुद ही अपना हाथ काट लिया होगा। वे मेरा मुकदमा लिखने को तैयार नहीं हैं।

पुलिस की अनोखी थ्योरी: पीड़ित ही बन गया आरोपी
हैरानी की बात यह है कि जिस परिवार की बेटी का सिर फटा और जिसके सदस्य लहूलुहान थे, पुलिस ने उनकी सुनने के बजाय दबंग कमल पाल की तरफदारी की। रवि का आरोप है कि पुलिस ने उनकी एफआईआर दर्ज नहीं की, बल्कि उल्टा उन पर और उनके भाई गौतम पर केस लाद दिया। पीड़ित का कहना है कि वह वरिष्ठ अधिकारियों दफ्तर के भी चक्कर काट चुका है, लेकिन हर जगह से उसे खाली हाथ लौटाया गया।

दबंगई का नंगा नाच: नशे में धुत होकर दी गालियां
सूत्रों की मानें तो विवाद तब शुरू हुआ जब नशे में धुत्त कमल पाल ने गौतम त्रिगुणायत के साथ गाली-गलौज की। जब घर की महिलाओं ने बीच-बचाव किया, तो आरोपी ने अपना आपा खो दिया और तीन-चार बाहरी लड़कों को बुलाकर घर पर धावा बोल दिया।
थाने के सामने कर लूंगा आत्मदाह
सिस्टम से हार चुके रवि शंकर ने अब अंतिम रास्ता चुन लिया है। उन्होंने वीडियो में दो टूक कहा है कि अगर मेरी सुनवाई नहीं हुई, तो मैं थाने के बाहर ही आत्मदाह कर लूंगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी पुलिस विभाग और कमल पाल की होगी। ये लोग हमें जीने नहीं दे रहे हैं।
क्या रसूख के आगे झुक गई है खाकी ?
यह मामला सिर्फ दो पड़ोसियों की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह भोपाल पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक काला धब्बा है। जब वीडियो साक्ष्यों में बच्ची का सिर फटा दिख रहा है, तो पुलिस उसे खुद की चोट बताकर कैसे खारिज कर सकती है? क्या राजधानी में अब न्याय केवल रसूखदारों के लिए सुरक्षित है?
नोट: यह न्यूज़ रवि त्रिगुणायत के वक्तव्य के आधार पर प्रकाशित किया गया है। इसमें न्यूज क्राइम फाइल का कोई व्यक्तिगत हित निहित नहीं है।



