भोपाल / छतरपुर:
केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत विस्थापित हो रहे आदिवासियों और किसानों के मुद्दों को लेकर सियासत गरमा गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र और राज्य सरकार पर आदिवासियों की अनदेखी का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, स्थानीय स्तर पर प्रभावित ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है।
राहुल गांधी का सरकार पर हमला
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रभावित आदिवासियों के आंदोलन का एक वीडियो साझा किया। उन्होंने लिखा कि मोदी सरकार सत्य और सत्याग्रह दोनों से डरती है और शांतिपूर्ण आंदोलन को पुलिस बल से कुचला जा रहा है। उन्होंने मांग की कि सरकार प्रभावित परिवारों को न्यायपूर्ण मुआवजा और सम्मानजनक पुनर्वास दे। कांग्रेस पार्टी इन परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है।

छतरपुर में 24 गांवों का विस्थापन
- प्रभावित क्षेत्र: केन-बेतवा लिंक परियोजना के कारण छतरपुर जिले के कुल 24 गांव विस्थापित हो रहे हैं।
- डूब क्षेत्र: इनमें से 8 गांव डूब क्षेत्र में हैं, जहां सबसे ज्यादा विरोध देखने को मिल रहा है।
- पन्ना टाइगर रिजर्व: शेष 16 गांव पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र में शामिल किए जाएंगे।

मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन
ग्रामीणों और प्रशासन के बीच मुआवजे को लेकर पेंच फंसा हुआ है:
- ग्रामीणों की मांग: विकसित ग्राम में भूखंड और 5 लाख रुपये मुआवजा।
- प्रशासन का प्रस्ताव: प्रशासन की ओर से 12.50 लाख रुपये नकद मुआवजा दिया जा रहा है।
प्रशासन द्वारा पानी के अंदर ‘चिता आंदोलन’ कर रहे प्रदर्शनकारियों को 20 जुलाई को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में हटाए जाने के बाद, अब ग्रामीणों ने ‘चूल्हाबंदी आंदोलन’ शुरू कर दिया है। विस्थापित हो रहे लोगों का संघर्ष और शिक्षा पारीक की मार्मिक कविता इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बनी हुई है।




