लेखक, वजाहत खान।
मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में कई वरिष्ठ अफसर लूप लाइन में अपना समय बिता रहे हैं और वही कई अफसर नेताओं और बड़े ब्यूरोक्रेट्स की चापलूसी कर अच्छी पोस्टिंग पर है। इसके साथ ही कई बार नेताओं से पुलिस अफसरों की नहीं बनती इसका प्रमुख कारण है के नेताओं द्वारा पुलिस अधिकारियों पर दबाव बनाया जाता है, और उनकी बात ना मानने पर अधिकारियों को लूप लाइन का रास्ता दिखाया जाता है। आइए जानते हैं आखिर ऐसा भेदभाव वरिष्ठ अफसरों के साथ क्यों किया जा रहा है और कैसे चापलूस अच्छी पोस्टिंग लेकर घी पी रहे हैं।

ऊपर से नीचे तक होती है अच्छी पोस्टिंग के लिए फील्डिंग
सूत्रों के अनुसार कई पुलिस अधिकारी अपनी मनपसंद पोस्टिंग के लिए कई बड़े लोग जैसे विधायक मंत्री और कई बड़े अफसर की फील्डिंग करते हैं यानी चापलूसी जिसका फल उन्हें अच्छी जगह पोस्टिंग के रूप में मिलता है। सूत्र बताते हैं कि विधायक और मंत्री की बात ना मानना कई अफसरों का भारी पड़ता है जिसके बाद उन्हें सालों तक लूप लाइन में नौकरी करना पड़ती है और वही कुछ लोग अपने आकाओ की चापलूसी करते हैं इसके बाद उनके आका उन्हें मनचाही पोस्टिंग दिलवा देते हैं। यही कारण है कि कई वरिष्ठ और उत्कृष्ट कार्य करने वाले दबंग पुलिस अधिकारी चापलूसी ना करने के कारण लूप लाइन में हैं।
दबंग पुलिस अफसरों की कमी
दबंग अफसरों की कमी की यही सबसे बड़ी वजह है कि प्रदेश में चापलूस पुलिस अफसरों का बोलबाला बढ़ता जा रहा है. बीते सालों में ऐसे कई मामले सामने आए, जिसने सिस्टम पर सवाल खड़े किए हैं। साथ ही प्रदेश में कई ऐसे जिले हैं जहां अपराध का ग्राफ बढ़ता जा रहा है, जिसे कम करने के लिए मध्य प्रदेश पुलिस के पास कई ऐसे बहादुर और दबंग अफसर हैं जो अपराधियों पर नकेल कसने का दम रखते हैं और वे लूप लाइन से बाहर आकर मैदानी पोस्टिंग के लिए तैयार है, लेकिन नेताओं ने अपने करीबियों को मैदानी पोस्टिंग दिलवा रखी है।

विभागों में आयुक्त बनने के लिए….
मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में कई अफसर दूसरे विभागो में आयुक्त बनने के लिए अपने आकाओं की चापलूसी करने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। इसके साथ ही उनके तबादले भी देरी से किए जाते हैं।
रिश्तेदारों को अच्छे पद पर बिठाया
मध्य प्रदेश पुलिस विभाग के कुछ अफसर अपने नेता रिश्तेदारों के नाम से रौब जमाते हैं, और क्यों ना जमाय उनके रिश्तेदार सत्ताधारी पार्टी के बड़े नेता जो ठहरे, यही कारण है सत्ता में आते ही नेताजी ने अपने करीबी को एक बड़े विभाग का आयुक्त बना दिया साथ ही वह विभाग भी नेता जी ने खुद के पास रखा है, इस पद के लिए प्रदेश सरकार के पास कई बेहतर अफसर मौजूद थे। परंतु सवाल ये उठता है कि इमानदारी से और बगैर चापलूसी किए नौकरी करने वाले अफसरों को कब ऐसे पदो पर बैठने का मौका मिलेगा।

एक ऐसा अफसर जिसे हमेशा मिली अच्छी पोस्टिंग कैसे?
मध्य प्रदेश का एक ऐसा अफसर जिसे हमेशा से ही अच्छे जिलों में पोस्टिंग मिली है। सूत्रों के मुताबिक इस अफसर की शुरुआत भोपाल से हुई थी, बाद में वे यही के एसपी भी बने इसके बाद उन्हें लोकायुक्त एआईजी बनाकर भेज दिया गया। कुछ समय बाद उनका प्रमोशन कर डीआईजी बना दिया गया डीआईजी बनने के बाद भी उन्हें मैदानी जिले में पोस्टिंग दी गई। अब वे मध्य प्रदेश के एक विभाग में डिप्टी कमिश्नर के पद पर कार्य कर रहे हैं।

आकाओं के खिलाफ खबर लिखने पर पत्रकारों को करते हैं बेइज्जत
हाल ही में मध्य प्रदेश के सीधी जिले की पुलिस ने पत्रकारों को गिरफ्तार किया था। थाने में कपड़े उतरवाए और फोटो खींचकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए। यहां तक कि हवालात में भी इन पत्रकारों को सिर्फ अंडरगारमेंट्स में ही बिठाया था। इन पत्रकारों की गलती इतनी थी कि उन्होंने भाजपा विधायक केदारनाथ शुक्ला के खिलाफ खबरें लिखी थी।




