Thursday, October 1, 2026
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सड़क बनाने के पहले साइड ड्रेन और शोल्डर बनेंगे

सड़कों के किनारे पानी निकासी के लिए नाली न बनाए जाने से होने वाले सड़कों के नुकसान को लेकर नगरीय विकास विभाग अब गंभीर हुआ है। बारिश के दौरान विभाग द्वारा जिलों में नगरीय निकायों की सड़कों का इंस्पेक्शन कराने के बाद सौंपी गई रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि मैक्सिमम सड़कें साइड ड्रेन और शोल्डर नहीं होने के कारण उखड़ी हैं क्योंकि सड़कों पर जलभराव के बाद पानी की निकासी नहीं हो पाई है।

इसके बाद अब सभी नगरीय निकायों को निर्देश जारी किए गए हैं कि सड़कों के निर्माण के लिए जो भी एस्टीमेट बनेंगे उसमें साइड ड्रेन और शोल्डर बनाने का काम प्राथमिकता के आधार पर करना होगा।

प्रदेश की नगरीय निकायों में कायाकल्प, मुख्यमंत्री शहरी अधोसंरचना विकास के चौथे चरण, मुख्यमंत्री नगरीय अधोसंरचना विकास योजना एवं अन्य योजनाओं के अन्तर्गत सड़कों का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। इन योजनाओं के अन्तर्गत कराए जा रहे कार्यों की क्वालिटी एवं परियोजना प्रबंधन के लिये संचालनालय, नगरीय प्रशासन एवं विकास भोपाल ने 2 सितम्बर को पत्र लिखा था जिसमें स्वतंत्र गुणवत्ता इकाई (इंडिपेंडेंट क्वालिटी मैनेजमेंट यूनिट) लिस्टेड की जाकर इन यूनिट्स को सड़कों के निरीक्षण के लिये जिले आवंटित किए गये थे। इसके लिए आइक्यूएम के एक्सपर्ट्स द्वारा आवंटित जिलों की नगरीय निकायों में निर्मित और निर्माणाधीन सड़कों का निरीक्षण किया गया।

इन्फेक्शन के बाद हुई सड़कों की समीक्षा

इस इन्फेक्शन के बाद सड़कों की स्थिति की समीक्षा की गई। इसके लिए नगरीय विकास आयुक्त ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से रिव्यू किया। समीक्षा में यह तथ्य सामने आया है कि नगरीय निकायों में निर्मित और निर्माणाधीन सड़कों में साइड ड्रेन एवं शोल्डर का निर्माण नहीं किया जा रहा है, जिससे सुचारू रूप से पानी का निकास न होने से सड़कों के ऊपर जलभराव रहता है और सड़कें क्षतिग्रस्त हो जाती है।

सभी अधीक्षण यंत्री, कार्यपालन यंत्री को मिले निर्देश

विभाग के प्रमुख अभियंता ने विभाग के सभी अधीक्षण यंत्री और कार्यपालन यंत्री को इसके बाद निर्देश जारी किए हैं कि सड़कों के निर्माण के लिए संभाग स्तर पर जारी किए जाने वाले तकनीकी स्वीकृति प्रस्ताव में यह स्पष्ट रखें कि सड़क निर्माण कार्य के एस्टीमेट में साइड ड्रेन एवं शोल्डर का कार्य आवश्यक रूप से सम्मिलित किया जाये। साथ ही कार्य में उपयोग होने वाले निर्माण सामग्री का परीक्षण कराने के बाद ही निर्माण कार्य कराया जाए। इसके लिए आवश्यकता अनुसार क्यूब टेस्ट भी कराया जाए।

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