विदिशा। शहर में एक बड़े गोल्ड लोन घोटाले का मामला सामने आया है, जहाँ करीब आधा दर्जन मजदूरों के नाम पर उनकी जानकारी के बिना लाखों रुपए का ऋण स्वीकृत करा लिया गया। पीड़ितों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दर्ज कराते हुए एक संगठित गिरोह, स्थानीय ज्वेलर्स और बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत का आरोप लगाया है।
क्या है पूरा मामला?
पीड़ित मजदूरों के अनुसार, लगभग 11 महीने पहले उन्होंने एक मकान निर्माण का काम लिया था। उस दौरान मकान मालिक ने भुगतान का झांसा देकर उनसे आधार कार्ड, बैंक पासबुक और चेकबुक जैसी महत्वपूर्ण दस्तावेज ले लिए। आरोप है कि धोखे से उन पर हस्ताक्षर करवाए गए और उन्हें बताया गया कि यह केवल कागजी प्रक्रिया है।
नकली सोना और बैंक की मिलीभगत का अंदेशा
पीड़ितों का दावा है कि आरोपियों ने नकली सोने को बैंक में गिरवी रखकर उनके नाम पर लोन पास कराया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि लोन की राशि मजदूरों तक कभी पहुँची ही नहीं, बल्कि चेक के जरिए निकाल ली गई। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि इस तरह के करीब 123 लोगों को निशाना बनाया गया है।
पुलिस की जांच शुरू
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक रोहित काशवानी ने जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने बताया कि बैंक रिकॉर्ड और दस्तावेजों की गहन पड़ताल की जा रही है। जांच के बाद दोषी पाए जाने वाले बैंक अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों पर सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।




