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लापता ओबीसी नेता के केस में बनेगी नई SIT, मंत्री गोविंद राजपूत पर है गायब कराने का आरोप

सागर के लापता ओबीसी नेता मान सिंह पटेल की गुमशुदगी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित करने के आदेश दिए हैं। इस मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मंत्री राजपूत की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक को आईपीएस अधिकारियों की एक नई SIT गठित करने का निर्देश दिया। एसआईटी आईजी रैंक के अफसर की अध्यक्षता में गठित करनी है।

सबसे पहले जानिए क्या है मामला

मान सिंह पटेल साल 2016 में लापता हो गए थे। जमीन विवाद मामले में उनके बेटे सीताराम ने तत्कालीन राजस्व एवं परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और उनके सहयोगियों पर पिता को गायब कराने का आरोप लगाया था। सीताराम ने पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराने आवेदन दिया था, लेकिन पुलिस ने मान सिंह की गुमशुदगी दर्ज कर ली।

इस मामले में मंत्री का नाम आने के बाद पुलिस ने जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था। इस एसआईटी की जांच को सुप्रीम कोर्ट ने महज दिखावा बताते हुए नई SIT बनाने और उसमें दूसरे राज्यों के सीनियर आईपीएस अफसरों को शामिल कर जांच करने के निर्देश दिए हैं।

मंत्री पर लगाया था पुश्तैनी जमीन पर कब्जे का आरोप

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मान सिंह के बेटे सीताराम पटेल ने एमपी के तत्कालीन राजस्व और परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत पर अपने पिता की गुमशुदगी और उनकी पुश्तैनी जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगाया था। इस मामले में ओबीसी महासभा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

सीताराम पटेल ने दावा किया था कि उनके पिता अगस्त 2016 में उस समय लापता हो गए, जब उन्होंने मंत्री राजपूत के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। यह शिकायत सागर जिले में उनकी पुश्तैनी जमीन पर मंत्री और उनके साथियों द्वारा अवैध कब्जा और निर्माण से संबंधित थी।

सीताराम ने आगे आरोप लगाया कि उन्हें चुप कराने और संपत्ति पर कब्जा करने के लिए उनके पिता को गायब कराया गया था। स्थानीय प्रशासन और सीएम हेल्पलाइन को कई बार शिकायत करने के बावजूद मान सिंह का पता लगाने के लिए ठोस पुलिस कार्रवाई नहीं की गई।

कोर्ट ने कहा- जिन पर आरोप उनके हित में भी संदेह दूर होना चाहिए

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- “इसमें कोई दो राय नहीं है कि लापता व्यक्ति को जानने वाले लोगों के मन में छिपे संदेह को संतोषजनक ढंग से दूर किया जाना चाहिए। यहां तक ​​​​कि उन लोगों के हित में भी जिनके खिलाफ संदेह की सुई उठाई गई है।”

मानसिंह पटेल का पता लगाने में पुलिस की असमर्थता पर कोर्ट ने 2023 की एफआईआर पर सवाल उठाया, जिसमें सीताराम ने कथित तौर पर कहा था कि पुलिस के अनुसार उनके पिता लापता नहीं हुए हैं।

इस पर अदालत ने कहा- “इस स्तर पर, हम सीताराम द्वारा दिए गए बयान को संबोधित करना चाहते हैं, जिसके कारण एफआईआर संख्या 23/2023 दर्ज की गई। उस बयान को देखते हुए मानसिंह पटेल हैं, लापता नहीं हैं? मानसिंह अक्सर अपने घर आते-जाते रहते हैं, हम समझ नहीं पा रहे हैं कि स्थानीय पुलिस उनका पता क्यों नहीं लगा पाई है और हमारे सामने कोई स्पष्ट रुख क्यों नहीं अपना पाई है? मिसिंग रिपोर्ट नंबर 9/2016 में लगा आरोप झूठा है और इसका कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है।”

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