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आरपीएफ टिकट घोटाला: जांच टीम की संलिप्तता पर उठे सवाल, जांच शुरू

नागपुर, महाराष्ट्र — रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (आरपीएफ) में एक नया विवाद उभर आया है, जिसमें विशेष खुफिया शाखा (एसआईबी) पर टिकट दलाली में शामिल होने के आरोप लगे हैं। त्योहारों के इस सीजन में जब रेलवे टिकटों की मांग बढ़ गई है, इस घटना ने आरपीएफ के आंतरिक कार्यों और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हाल ही में, आरपीएफ के आईजी मुनव्वर खुर्शीद ने अवैध टिकट दलालों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। हालांकि, एक यात्री की शिकायत के बाद आरपीएफ की उस टीम पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जो आरपीएफ स्टाफ की निगरानी का जिम्मा संभालती है और अपनी रिपोर्ट सीधे आईजी और डीआईजी को सौंपती है। अब यह टीम भी कथित कदाचार के आरोपों की जांच के दायरे में आ गई है।

यह घटना नागपुर रेल मंडल के गोंदिया आरक्षण केंद्र पर हुई बताई जा रही है। एक यात्री का दावा है कि एसआईबी का एक सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) तत्काल टिकट बनाने के ठीक दो मिनट पहले काउंटर पर पहुंचा और यात्री से बातचीत करते हुए उनके बुकिंग फॉर्म में दिए गए यात्रियों को फोन किया। ध्यान देने योग्य बात यह है कि एसआईबी का काम केवल आरपीएफ स्टाफ की निगरानी करना और अपनी गोपनीय रिपोर्ट जमा करना है, न कि यात्रियों के साथ सीधे बातचीत करना।

शिकायतकर्ता का संदेह है कि एएसआई खुद के लिए टिकट बुक करवाने या काउंटर पर हो रही टिकटिंग प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर रहा था। टिकट बनने के बाद आरक्षण काउंटर का पर्दा तुरंत नीचे कर दिया गया, जिससे वहां मौजूद लोगों में संदेह बढ़ गया।

सीसीटीवी फुटेज की जांच

इस शिकायत के जवाब में, अधिकारियों ने आरक्षण केंद्र के सीसीटीवी फुटेज की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, शिकायतकर्ता के रिश्तेदारों ने एएसआई के साथ बातचीत देखी, और घटना के दौरान एक आरपीएफ स्टाफ के फोन से रिश्तेदार को कॉल किया गया था। इन असामान्य गतिविधियों की अब विस्तार से जांच की जा रही है।

शिकायतकर्ता ने कहा कि दो दिन पहले भी इसी तरह की घटना घटी थी जब वह अपने परिवार के सदस्यों के लिए टिकट बनवाने गया था। त्योहारों के दौरान ऑनलाइन टिकट उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें काउंटर बुकिंग का सहारा लेना पड़ा। दोनों ही मौकों पर वही एसआईबी अधिकारी काउंटर पर आए और लाइन में लगे लोगों को टिकट दलाली के खिलाफ सख्त चेतावनी दी। हालांकि, एएसआई के इन बयानों ने सामान्य यात्रियों में भय पैदा कर दिया और उनके इरादों पर सवाल खड़े कर दिए।

आरपीएफ और एसआईबी की भूमिका पर सवाल

आरपीएफ की डाइरेक्टिव 52 के अनुसार, एसआईबी के सदस्यों की भूमिका केवल निगरानी और रिपोर्टिंग तक सीमित होती है और उन्हें यात्रियों से सीधे बातचीत करने का अधिकार नहीं होता। इस घटना से सिस्टम में मौजूद संभावित दुरुपयोग और उच्च रैंक के अधिकारियों की मिलीभगत के सवाल उठ रहे हैं, जो अवैध गतिविधियों को रोकने के बजाय उनमें संलिप्त पाए जा सकते हैं।

आरपीएफ ने इस मामले में औपचारिक जांच शुरू कर दी है, और गोंदिया आरक्षण केंद्र के स्टाफ को भी किसी प्रकार की मिलीभगत या अनियमितता के लिए जांच के दायरे में रखा गया है। यात्रियों का भरोसा इस जांच से जुड़ा हुआ है, और उन्हें उम्मीद है कि इस जांच से पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।

यह चल रही जांच आरपीएफ में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को उजागर करती है, खासकर उस समय में जब यात्रियों की संख्या और टिकटों की मांग चरम पर होती है। जैसे-जैसे अधिकारी इस मामले को निष्कर्ष तक ले जाने की दिशा में काम कर रहे हैं, आम जनता ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ रेलवे टिकटिंग सिस्टम में सुधार की उम्मीद लगाए बैठी है।

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