बेंगलुरु में सॉफ्टवेयर इंजीनियर अतुल सुभाष मोदी ने पत्नी और ससुराल वालों से परेशान होकर आत्महत्या कर ली। इसे लेकर इंदौर में विरोध प्रदर्शन और कैंडल मार्च का आयोजन किया जाएगा।
पुरुष अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था ‘पौरुष’ ने आज 22 दिसंबर को शाम 5 बजे से नेहरू पार्क में प्रदर्शन, नारेबाजी और कैंडल मार्च की योजना बनाई है। इस दौरान “न्यायिक और कानूनी स्वच्छता” की मांग को उठाया जाएगा।
बड़ी संख्या में पुरुष आत्महत्या कर रहे
संस्था ‘पौरुष’ के अध्यक्ष अशोक दशोरा और प्रदेश संयोजक प्रदीप मेश्राम ने बताया कि महिला कानूनों के दुरुपयोग के कारण हर साल बड़ी संख्या में पुरुष आत्महत्या कर रहे हैं।
- झूठे दहेज, घरेलू हिंसा और 498ए जैसे मामलों से पुरुषों का आर्थिक और मानसिक शोषण किया जा रहा है।
- पुलिस, महिला कानून और न्यायिक व्यवस्था में मौजूद खामियां युवा वर्ग के लिए खतरा बन गई हैं।
- अतुल सुभाष मोदी की आत्महत्या भी इसी अन्याय का नतीजा है।
प्रदर्शन में शामिल होने अपील
नेहरू पार्क में रविवार शाम 5 से 7 बजे तक पर्चे बांटने, नारेबाजी, श्रद्धांजलि और कैंडल मार्च का आयोजन होगा। संस्था ने समाज के सभी वर्ग से अपील की है कि वे इस आंदोलन में शामिल होकर अपनी आवाज उठाएं।

आत्महत्या से पहले वीडियो बनाया था
आत्महत्या से पहले अतुल सुभाष ने डेढ़ घंटे का वीडियो भी बनाया था, जिसमें उन्होंने अपनी आत्महत्या का कारण बताया है। वीडियो में सुभाष ने कहा,“मुझे लगता है कि आत्महत्या कर लेनी चाहिए, क्योंकि मैं जो रुपए कमा रहा हूं, उससे मेरे दुश्मन और मजबूत हो रहे हैं। उन्हीं रुपयों का इस्तेमाल मुझे बर्बाद करने के लिए किया जा रहा है और यह चक्र यूंही चलता रहेगा। मेरी ओर से चुकाए गए टैक्स से मिले पैसे से यह कोर्ट और पुलिस व्यवस्था मुझे, मेरे परिवार को और अन्य सज्जन लोगों को परेशान करेगी।”
परिजनों के लिए आखिरी अपील में सुभाष ने वीडियो में अपनी पत्नी और ससुराल वालों के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। उन्होंने परिजनों से कहा कि उनकी मौत के बाद पत्नी और उसके परिवार को उनके शव के पास आने की अनुमति न दी जाए। सुभाष ने यह भी कहा,”जब तक मेरे उत्पीड़न करने वालों को सजा नहीं मिल जाती, मेरी अस्थियों का विसर्जन न किया जाए। अगर उन्हें दोषी नहीं ठहराया जाता है, तो मेरी अस्थियों को अदालत के नाला के बाहर फेंक दें।
अतुल सुभाष के सुसाइड नोट की खास बातें
- पत्नी से अलगाव और कानूनी लड़ाई:अतुल सुभाष काफी समय से अपनी पत्नी से अलग रह रहे थे। पत्नी ने उन पर गंभीर आरोप लगाते हुए घरेलू हिंसा, हत्या की कोशिश, और अप्राकृतिक यौनाचार जैसे केस दर्ज कराए थे।
- डिप्रेशन का शिकार:कोर्ट में लंबित केस और बार-बार की तारीख के कारण अतुल का मानसिक तनाव बढ़ता जा रहा था। इसका असर उनके डिप्रेशन लेवल पर पड़ा, जो आत्महत्या का बड़ा कारण बना।
- पंखे से लटकती मिली लाश:सोमवार सुबह बेंगलुरु स्थित उनके घर में अतुल सुभाष की लाश पंखे से लटकती हुई पाई गई।
- अत्यधिक कोर्ट की तारीखें:अतुल को कोर्ट से अब तक 120 तारीखें मिलीं। वह 40 बार बेंगलुरु से जौनपुर जाकर पेशी भुगत चुके थे।
- परिवार पर असर:कानूनी मामलों का दबाव सिर्फ अतुल तक सीमित नहीं था। उनके माता-पिता और भाई को भी बार-बार कोर्ट के चक्कर काटने पड़ रहे थे।
आवश्यक कदम उठाने की मांग
संस्था का कहना है कि न्यायिक और कानूनी व्यवस्था में बदलाव जरूरी है, ताकि पुरुषों के अधिकारों की रक्षा हो सके और ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।




