शाहीनाका गढा के तिवारी परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटने के बाद शनिवार को जैसे ही मृतकों के शव घर पहुंचे आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। लोग यही सोच रहे थे कि जो लोग किसी को तारने का पुनीत करने के लिए गंगाजी जा रहे थे वो ही आज निढाल होकर जमीन पर पड़े हैं। हर आंख नम थी। इस परिवार में जहां बेटे को खोने का गम रहा, वहीं परिवार की ही बेटी के माथे का सिंदूर मिटने का भी विशाद रहा।
बताया जाता है कि तिवारी परिवार की दिवंगत दादी मां आशा देवी तिवारी की अस्थियों का विसर्जन करने के लिए शुक्रवार की शाम 4 बजे तिवारी परिवार के तीन सदस्य और एक दामाद प्रयागराज रवाना हुए थे। यहां से रवाना हाेने वालों में सचिन गर्ग (48 वर्ष), राजेश तिवारी (44 वर्ष), अक्षत तिवारी (23 वर्ष) और अमन तिवारी उर्फ नमन तिवारी (20 वर्ष) शामिल रहे। सचिन गर्ग आशा देवी के दामाद रहे। जबकि राजेश तिवारी उनके बेटे और अक्षत व अमन नाती हैं। अमन ने नईदुनिया से बात करते हुए बताया कि उनकी कार जैसे ही मैहर के ठीक पहले जेके सीमेंट प्लांट वाले मोड़ के पास पहुंची, उसे गलत दिशा से आ रहे हाईवा ने सामने से टक्कर मार दी। हाईवा की रफ्तार इतनी अधिक रही कि करीब पूरी कार उसके नीचे फंस गई। अमन की किस्मत अच्छी रही कि वो पीछे बैठा रहा और जैसे ही एक्सीडेंट हुआ कार का उसकी साइड का दरवाजा उखड़ गया, जिससे वो कार से बाहर जा गिरा। अमन ने बताया कि उसने अपनी गोद में ही अपने फूफाजी सचिन गर्ग को अंतिम सांसें लेते देखा। जबकि उस वक्त तक अक्षत की सांसें चल रही थी। अमन ने ही डायल 100 को फोन करके घटना की सूचना दी और एम्बुलेंस को बुलवाया। इसके बाद अक्षत को उपचार के लिए मैहर अस्पताल भी पहुंचवाया। लेकिन वहां तत्काल उपचार नहीं मिल पाने की वजह से अक्षत की सांसें थम गईं।
अमन के स्वजन रात में ही उसे और राजेश तिवारी को घायल अवस्था में लेकर जबलपुर आ गए थे। यहां एक निजी अस्पताल से प्राथमिक उपचार के बाद जहां अमन को छुट्टी दे दी गई, वहीं गंभीर रूप से घायल राजेश का अभी इलाज जारी है। राजेश के बाएं हाथ और पैर की हड्डी कई जगह से टूट गई। साथ ही उसके चेहरे पर चोटें आईं। अक्षत का अंतिम संस्कार चौहानी मुक्तिधाम और सचिन गर्ग का उनके गृहग्राम कैथरा बेलखेड़ा के श्मसान घाट पर किया गया।
कार में कौन कहां बैठा था… : अमन ने बताया कि कार को सचिन गर्ग चला रहे थे। उनके बगल वाली सीट पर राजेश तिवारी बैठे थे। जबकि राजेश के पीछे अमन खुद और सचिन के पीछे अक्षत बैठा था। अक्षत हादसे के वक्त बुरी तरह से ड्राइवर-सीट की चपेट में आ गया था।
नर्मदा में किया अस्थि-विसर्जन : आशा देवी के बड़े बेटे सतीश तिवारी ने रूंधे गले से कहा कि शायद अम्मा गंगाजी नहीं जाना चाहती थीं। इसलिए इतना बड़ा हादसा हो गया। हादसे के बाद हममें से कोई भी प्रयागराज जाने की स्थिति में नहीं रहा इसलिए अम्माजी की अस्थियों को हम लोगों ने नर्मदा जी के लम्हेटा घाट में विसर्जित कर दिया।




