नगर निगम सीमा में नल कनेक्शन बढ़ाने और नई कॉलोनियों को वाटर सप्लाई सिस्टम से जोड़ने की कवायद शुरू हो गई है। इसके लिए भोपाल नगर निगम जल्द जीआईएस बेस्ड सर्वे करवाने जा रहा है। वाटर डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क में अच्छा काम करने पर इंसेंटिव के तौर पर मिले 15 करोड़ में से सर्वे का खर्च करीब 1.27 करोड़ रुपए निकाला गया है।
इसके तहत दो तरह के सर्वे होंगे। पहले में नगर निगम के वाटर सप्लाई एसेट यानी पंप हाउस, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और ओवरहेड टैंक से सप्लाई एरिया की मैपिंग करेंगे।
दूसरा सर्वे उन सभी 5.30 लाख प्रॉपर्टीज का होगा, जिनसे प्रॉपर्टी टैक्स वसूला जाता है। सर्वे में देखेंगे कि इन प्रॉपर्टीज में पानी का सोर्स क्या है? कितने लोग निगम से पानी लेते हैं, कितनों के पास खुद का बोर हैं। सर्वे का मकसद ये भी है कि निगम सीमा में बढ़ी कॉलोनियों तक पानी सप्लाई की व्यवस्था कर सके।
एजेंसी की टीम घर-घर जाकर करेगी सर्वे
निगम जलकार्य शाखा के अफसरों का कहना है कि अमृत-2.0 के तहत सर्वे के टेंडर जारी कर दिए गए हैं। इससे नॉन रेवेन्यू वाटर (एनआरडब्ल्यू) का भी पता चलेगा। हालांकि, 2017-18 में भी भोपाल की प्रॉपर्टीज का जीआईएस बेस्ड सर्वे करवाया गया था। इस दौरान सैकड़ों भवनों की गलत एंट्री होने से आज तक लोग ज्यादा प्रॉपर्टी टैक्स आने से परेशान हो रहे हैं।
निगम का भी फायदा… सर्वे से निगम को नए हाउस होल्ड कनेक्शन मिलेंगे। जलकर से 2023-24 में 73 करोड़ मिले थे। 2024-25 में 100 करोड़ टारगेट है। अफसरों का दावा है कि इस बार 90 करोड़ की वसूली होगी। यानी 17 करोड़ का फायदा होगा।




