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भोपाल आरटीओ के सस्पेंशन के बाद सैंकड़ों आवेदक परेशान

भोपाल में बाणगंगा बस हादसे के बाद सस्पेंड हुए आरटीओ जितेंद्र शर्मा की जगह अब तक किसी नए प्रभारी की नियुक्ति नहीं की गई है। इधर, भोपाल आरटीओ कार्यालय में पिछले तीन दिनों से सभी कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं। सैकडों आवेदक आरटीओ कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, आरटीओ में प्रतिदिन औसतन 150 नए ड्राइविंग लाइसेंस बनाए जाते हैं, जबकि 200 से ज्यादा लाइसेंस रिन्यू किए जाते हैं। इसके अलावा गाड़ियों के ट्रांसफर के करीब 200 मामले, परमिट से जुड़े 200 आवेदन और आरसी रिन्युअल के लगभग 200 काम हर दिन होते हैं। लेकिन आरटीओ के निलंबन के बाद से यह पूरा सिस्टम जाम हो गया है।

लर्निंग लाइसेंस के आवेदकों पर संकट

इधर, पिछले दो दिनों में करीब 50 ऐसे आवेदक हैं जिनका लर्निंग लाइसेंस स्थायी लाइसेंस में बदलने की समय-सीमा 13, 14 और 15 मई को खत्म हो रही थी। अब इन आवेदकों को दोबारा पूरे प्रोसेस से गुजरना पड़ सकता है। विभाग से उन्हें कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं मिला है, जिससे वे असमंजस की स्थिति में हैं।

12 मई को हुआ था बड़ा हादसा, उसी शाम आरटीओ निलंबित 12 मई की शाम भोपाल के बाणगंगा चौराहे पर एक स्कूल बस ने 8 वाहनों को टक्कर मार दी थी। हादसे में एक इंटर्नशिप कर रही महिला डॉक्टर की मौत हो गई थी, जबकि 6 लोग घायल हुए थे। दो की हालत गंभीर बनी हुई है। जांच में सामने आया कि बस की फिटनेस 5 महीने पहले ही समाप्त हो चुकी थी और बीमा भी नहीं था।

संभाग आयुक्त संदीप सिंह ने प्रथम दृष्टया क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी की लापरवाही मानते हुए उसी दिन आरटीओ जितेंद्र शर्मा को निलंबित कर दिया। कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने तत्काल राहत के रूप में 5 पीड़ितों को रेडक्रॉस से 10-10 हजार रुपए की सहायता भी दिलवाई।

3 दिन में कोई नई नियुक्ति नहीं, व्यवस्था सुधारने की मांग

आरटीओ के निलंबन को तीन दिन बीत जाने के बावजूद अब तक किसी अन्य अधिकारी की अस्थाई नियुक्ति नहीं की गई है। इससे न केवल आवेदक बल्कि ड्राइविंग स्कूल संचालक, एजेंट और वाहन डीलर भी प्रभावित हैं। कार्यालय परिसर में रोजाना सैकड़ों लोग लौटाए जा रहे हैं। लोगों की मांग है कि विभाग जल्द से जल्द वैकल्पिक व्यवस्था करे ताकि आम जनता को राहत मिल सके और कार्यालय की नियमित कार्यप्रणाली बहाल की जा सके।

सिर्फ आरटीओ को दोषी ठहराना पर्याप्त नहीं: प्रकाश अग्रवाल इधर, इस पूरे मामले में सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश अग्रवाल ने मुख्यमंत्री सहित— मुख्य सचिव, म.प्र. शासन, संभागायुक्त, भोपाल व परिवहन आयुक्त, ग्वालियर को पत्र लिखकर ट्रैफिक पुलिस पर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा है कि बाणगंगा हादसे में केवल ड्राइवर या आरटीओ ही नहीं, बल्कि ट्रैफिक पुलिस और स्कूल प्रबंधन भी बराबर के दोषी हैं।

प्रकाश अग्रवाल ने सवाल उठाया कि ऐसी अनफिट बसें आखिर शहर में धड़ल्ले से कैसे चल रही हैं, और ट्रैफिक पुलिस ने अब तक इस पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की? उन्होंने मांग की है कि दोषी स्कूल की मान्यता तत्काल रद्द की जाए और पीड़ितों को स्कूल संचालक से क्षतिपूर्ति दिलवाने के लिए स्पष्ट नियम बनाए जाएं। साथ ही, इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और जो भी जिम्मेदार हों, उन पर कठोर कार्रवाई हो केवल आरटीओ को सस्पेंड करके खानापूर्ति न की जाए।

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