उज्जैन:
महाकाल मंदिर विस्तार और सड़क चौड़ीकरण के दायरे में आई उज्जैन की शाही मस्जिद को लेकर विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। जमीयत उलमा मध्य प्रदेश के अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारून ने प्रशासन और अदालत में पेश किए गए तथ्यों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दावा किया है कि कोर्ट में मस्जिद को महाकाल मंदिर के बिल्कुल करीब बताकर गुमराह किया गया, जबकि असल में दोनों के बीच पर्याप्त दूरी है।
हाजी हारून का कहना है कि यदि अदालत के सामने वास्तविक स्थिति और सही तथ्य रखे जाते, तो तस्वीर कुछ और होती। उन्होंने सवाल उठाया कि महज 3 फीट जगह के लिए सड़क का डिजाइन बदलने या अन्य विकल्पों पर विचार क्यों नहीं किया गया। उन्होंने सुझाव दिया कि सड़क चौड़ीकरण के लिए मस्जिद के सामने मौजूद ‘संदल वाली इमारत’ का अधिग्रहण किया जा सकता था, जिसके लिए मुस्लिम समाज मुआवजा राशि जुटाने को भी तैयार था। इसके अलावा गलियों को चौड़ा करने या अन्य संपत्तियों के विकल्प भी तलाशे जा सकते थे।
प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच हुई बातचीत पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि कुछ 8 लोगों की सहमति को पूरे समाज की सहमति नहीं माना जा सकता। यदि कोई निर्णय हुआ था, तो उसकी पारदर्शी जानकारी आम जनता को दी जानी चाहिए थी।
हारून ने आरोप लगाया कि जिस हिस्से को मैनुअल तरीके से हटाने की बात थी, वहां मशीनों का इस्तेमाल किया गया जिससे मीनार गिर गई और मस्जिद को क्षति पहुंची। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम की उच्च स्तरीय जांच और मस्जिद के पुनर्निर्माण की मांग की है। साथ ही, विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई गिरफ्तारियों को लेकर उन्होंने कहा कि कानून तोड़ने वालों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, लेकिन सभी प्रदर्शनकारियों को एक नजर से देखना गलत है। उन्होंने गिरफ्तार लोगों की रिहाई की मांग भी की है।
जमीयत अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि संगठन इस संवेदनशील मामले में आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से ज्ञापन और बातचीत के माध्यम से अपनी बात रखता रहेगा।




