भोपाल। प्रदेश के इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और बुंदेलखंड समेत कई जिलों में गहराते जल संकट को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने शिवराज सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता को भाषण नहीं, पीने का पानी और जीने का अधिकार चाहिए।
बच्चों की जान पर बन आई आफत
सिंघार ने प्रदेश की भयावह स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि आदिवासी अंचलों, बुंदेलखंड और महाकौशल में पानी की किल्लत चरम पर है। स्थिति इतनी गंभीर है कि मासूम बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर सूखे गड्ढों से पानी निकालने को मजबूर हैं। महिलाएं मीलों दूर पैदल चलकर पानी लाने के लिए संघर्ष कर रही हैं।
25 हजार करोड़ का बजट कहां गया?
नेता प्रतिपक्ष ने सरकार से सवाल किया कि ‘जल जीवन मिशन’ के लिए आवंटित 25 हजार करोड़ और ‘नल-जल योजना’ के 490 करोड़ रुपये का बजट आखिर कहां खर्च हुआ? उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश पर 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज होने के बावजूद आम जनता को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना पड़ रहा है।
मौसम विभाग की चेतावनी को नजरअंदाज किया
सिंघार ने सरकार पर ‘इवेंट मैनेजमेंट’ में व्यस्त रहने का आरोप लगाते हुए कहा कि मौसम विभाग ने भीषण गर्मी की चेतावनी पहले ही दे दी थी, लेकिन सरकार ने समय रहते कोई ठोस इंतजाम नहीं किए। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि विज्ञापनों पर फिजूलखर्ची बंद कर जनता की प्यास बुझाने के लिए युद्ध स्तर पर काम किया जाए।
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