जबलपुर | मध्य प्रदेश में परिवहन चेक पोस्टों को फिर से शुरू करने के मामले में आज एक नया मोड़ आ गया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने ही उस पुराने आदेश पर रोक लगा दिया है, जिसमें सरकार को एक महीने के भीतर सभी बंद चेक पोस्ट दोबारा खोलने के निर्देश दिए गए थे।
कोर्ट के इस फैसले से जहां राज्य सरकार को कानूनी उलझन से अस्थायी राहत मिली है, वहीं ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों ने भी चैन की सांस ली है।
क्या है पूरा मामला?
बीते 22 अप्रैल को जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार को फटकार लगाई थी। कोर्ट ने 30 जून 2024 के उस सरकारी आदेश को गलत माना था जिसके तहत चेक पोस्ट बंद किए गए थे। कोर्ट का तर्क था कि चेक पोस्ट सड़क सुरक्षा और ओवरलोडिंग रोकने के लिए जरूरी हैं।
भोपाल के ट्रांसपोर्टर अमन भोंसले द्वारा दायर रिव्यू पिटीशन (पुनर्विचार याचिका) पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अब उस आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है।
ट्रांसपोर्टर्स को क्यों मिली राहत?
जुलाई 2024 से बंद हुए इन चेक पोस्टों को लेकर ट्रांसपोर्टर्स का कहना था कि इन्हें दोबारा खोलने से भ्रष्टाचार और अवैध वसूली को बढ़ावा मिलेगा। चेक पोस्ट शुरू होने की खबर से ट्रांसपोर्ट संगठनों ने आंदोलन की चेतावनी भी दी थी, लेकिन आज के स्टे के बाद फिलहाल प्रक्रिया रुक गई है।
अब आगे की राह
परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह पहले ही संकेत दे चुके थे कि सरकार इस मामले में कानूनी राय ले रही है। अब गेंद सरकार और कोर्ट के पाले में है। मामले की अगली सुनवाई में यह तय होगा कि प्रदेश की सीमाओं पर पुराने नाके फिर लौटेंगे या परिवहन व्यवस्था बिना चेक पोस्ट के ही आधुनिक तरीके से संचालित होगी।
यह पूरा विवाद अब सड़क सुरक्षा और व्यापारिक सुगमता के बीच की एक बड़ी कानूनी जंग बन चुका है।
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