राजधानी के छोला थाने में इन दिनों लॉ एंड ऑर्डर से ज्यादा लाइक और शेयर’ पर फोकस चल रहा है। अगर आपके हाथ में मोबाइल है और आप इंस्टाग्राम के इन्फ्लुएंसर हैं, तो फिर आपके लिए थाने में रेड कार्पेट बिछा है। सोशल मीडिया पर इन दिनों छोला थाने का एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है। वीडियो में थाने के अंदर एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की पूरी आवभगत चल रही है। बाकायदा एसआई साहब का जन्मदिन मनाया जा रहा है और इन्फ्लुएंसर की मौजूदगी में केक कट रहा है।
कैमरे की चमक देखते ही एक दूसरे एसआई अहिरवार भी फ्रेम में आ गए और सेफ क्लिक 2.0 पर ऐसा ज्ञान बघारने लगे, जैसे किसी राष्ट्रीय चैनल का प्राइम टाइम चल रहा हो। अभी कुछ दिन पहले अधिमानित पत्रकार किसी मामले को लेकर थाने पहुंचे थे। एफआईआर दर्ज करने की बात पर एसआई अहिरवार ने उनसे अच्छा व्यवहार नहीं किया था। परंतु सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर के साथ एसआई अहिरवार सेफ क्लिक 2.0 के बारे में जानकारी साझा करते दिख रहे हैं। गजब शौक है। सोशल मीडिया पर फेमस होने का…।
रील वालों के लिए केक पार्टी
इस वीडियो ने पुलिस के दोहरे चरित्र की पोल खोल दी है। मजे की बात यह है कि कैमरे पर 32 दांत दिखाकर मुस्कुराने वाले इन पुलिसकर्मियों का पत्रकारों के सामने रवैया बिल्कुल उल्टा होता है। कोई जमीनी पत्रकार अगर किसी मामले की जानकारी लेने थाने पहुंच जाए, तो साहब लोगों की त्यौरियां चढ़ जाती हैं। सीधे मुंह बात करना तो दूर, पत्रकारों से ऐसी बदतमीजी की जाती है जैसे उन्होंने थाने आकर कोई बहुत बड़ा अपराध कर दिया हो।
आम जनता के लिए रूखापन ही नियम है
वैसे छोला थाने के ज्यादातर पुलिसकर्मियों की खातिरदारी के किस्से इलाके में जगजाहिर हैं। आम फरियादी अगर शिकायत लेकर जाए, तो उसे ऐसा घुमाया जाता है कि वो अपनी असली परेशानी ही भूल जाए। जनता से सीधे मुंह बात करने में पुलिसकर्मियों के मुंह दुखते हैं, लेकिन इन्फ्लुएंसर का कैमरा ऑन होते ही उनके अंदर की सारी मिठास बाहर आ जाती है।
अब बड़ा सवाल…
क्या थानों में अब बिना किसी मानक वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को केक काटने और पुलिस का इंटरव्यू लेने का वीआईपी पास मिल गया है? वीडियो देखकर तो यही लगता है कि अगर आपको छोला थाने में पुलिस से अच्छे से बात करनी है, तो पहले आपको एक वायरल रील बनानी पड़ेगी। असली पत्रकारिता और जनसेवा तो अब शायद बैकसीट पर चली गई है ।
मुफ्त सलाह…
अब तो भोपाल के लोगों और खबरों की तलाश करने वालों के लिए एक ही मुफ्त सलाह है – अगर छोला थाने में सम्मान पाना है, तो प्रेस आईडी कार्ड या शिकायत की कॉपी घर छोड़िए, बस एक ‘रिंग लाइट’ और ‘गिम्बल’ खरीद लीजिए। वहां जाकर कहिए, “हेलो गाइज, मैं हीरो भोपाली वेलकम टू माय न्यू ब्लॉग…” यकीन मानिए, साहब आपको खुद अपनी कुर्सी पर बैठाकर चाय-समोसे भी पूछेंगे!



