मियां, अपने भोपाल के जहांगीराबाद थाने से एक ऐसा वीडियो वायरल हो रियो है, जिसने पुलिस वालों के सिस्टम और उनके भौकाल की बखिया उधेड़ के रख दी है। हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी और टीआई साब राजन सिंह के बीच भयंकर वाली भसड़ का जे वीडियो सोशल मीडिया पे गदर मचा रियो है। थाने के अंदर, एक बड़े अफसर के सामने जिस तरह से खाकी वर्दी पे फालतू के आरोप लगाए गए और धमकियां दी गईं, वो एकदम टेंशन वाली बात है भिया।
का है पूरा बखेड़ा?
वायरल वीडियो में हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी, टीआई राजन सिंह पे कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के दबाव में काम करने का इल्जाम मढ़ते दिख रए हैं। बात इत्ते पे ही नई रुकी। तिवारी जी ने तो सरेआम टीआई साब से केह दिया, अंडरस्टैंडिंग से चलोगे तो फायदे में रओगे… का, पैसे-वैसे खा लए हो का? इसपे टीआई राजन सिंह ने भी फुल टशन में पलट के बोला, ज्यादा फालतू बात नई करो। अब सबसे भयंकर बात तो जे है कि ये पूरा ड्रामा एसीपी हबीबगंज उमेश तिवारी के ऐन सामने चल रियो था, पर उन्होंने बीच-बचाव करके समिति के अध्यक्ष को नियम-कानून याद दिलाने के बजाय मुंह पे ताला डालना ज्यादा सही समझा। उनकी जे चुप्पी कई सारे सवाल खड़े कर री है।
खाकी की इज्जत का कचरा
अपन की पुलिस दिन-रात, सर्दी-गर्मी और बारिश में सड़क पे मुस्तैद रेहती है। ऐसे में किसी संगठन के अध्यक्ष द्वारा सरेआम एक टीआई साब की ऐसे बेइज्जती करना, न सिर्फ उनकी इज्जत की वाट लगाता है, बल्कि पूरी पुलिस फोर्स का मोराल भी डाउन कर देता है। अब भिया, सोशल मीडिया के इस जमाने में जब जे वीडियो वायरल होता है, तो उन अफसर के घर-परिवार वालों को कैसा लगता होगा? का एक टीआई की समाज में कोई इज्जत-विज्जत नई है क्या, जिसे कोई भी आके सरेआम उछाल दे?
दोहरे नियम-कानून पे उठते सवाल
खुद को कानून का बाप समझने वाले चंद्रशेखर तिवारी का बखेड़ों से पुराना नाता है भिया। अभी कुछ दिन पेहले ही ऊल-जलूल बयानबाजी करके लोगों को भड़काने के चक्कर में टीटी नगर पुलिस उनके खिलाफ एफआईआर पेल चुकी है। अब शहर के समझदार लोग एक ही बात पूछ रए हैं। अगर ये ही हरकत कोई आम आदमी या किसी दूसरे समाज का बंदा करता, तो का पुलिस ऐसे ही मुंह ताकती रेहती? क्या रसूखदार लोगों और संगठन वालों के लिए पुलिस के नियम अलग-से बनके आते हैं?
पुलिस कमिश्नर साब से एक्शन की उम्मीद
अब टेम आ गियो है कि सिस्टम इस बकलोली पे लगाम कसे। भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार साब को इस मामले में तुरंत एक्शन लेना चहिए। ऐसे लोगों पे तगड़ी कार्रवाई करके जे मैसेज देना भोत जरूरी है कि कानून और खाकी का सम्मान सबसे ऊपर है। अगर टेम रेहते ऐसे लोगों की अक्ल ठिकाने नई लगाई गई, तो पब्लिक की नजरों में पुलिस की छवि और भरोसा दोनों एकदम बैठ जाएंगे। पुलिस वालों का भौकाल बनाए रखने के लिए बड़े अफसरों को अपने मातहतों के सम्मान के लिए सीना तान के खड़ा होना ही पड़ेगा मियां।



