भोपाल। राजधानी के गांधी मेडिकल कॉलेज और हमीदिया अस्पताल के डॉक्टरों ने गंभीर हालत में पहुंचे 28 साल के एक युवक की जान बचाकर मिसाल पेश की है। नसरुल्लागंज निवासी युवक ने सल्फास खा लिया था, जिससे उसके दिल में सूजन आ गई थी और किडनी ने भी काम करना बंद कर दिया था। डॉक्टरों की टीम ने लगातार दो दिन डायलिसिस और सघन इलाज कर उसे पूरी तरह स्वस्थ कर दिया है।
मरीज को 6 अगस्त की रात सीहोर से रेफर कर हमीदिया लाया गया था। अस्पताल पहुंचते ही जांच में पता चला कि जहर के असर से मरीज शॉक में है और उसका ब्लड प्रेशर तेजी से गिर रहा है। ईसीजी में दिल की मांसपेशियों में गंभीर सूजन पाई गई। डॉक्टरों ने तुरंत उसे मेडिसिन आईसीयू में भर्ती कर बीपी स्थिर करने और दिल को सपोर्ट देने की दवाएं शुरू कीं।
इलाज के तीसरे दिन जहर के कारण मरीज की किडनी फेल होने की कगार पर पहुंच गई और यूरिया-क्रिएटिनिन खतरनाक स्तर तक बढ़ गया। मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. मंजुला गुप्ता के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने तुरंत हीमोडायलिसिस शुरू कर खून से टॉक्सिन बाहर निकाले। लगातार दो दिन चले डायलिसिस के बाद किडनी ने दोबारा सामान्य काम करना शुरू कर दिया।
दो हफ्ते के इलाज के बाद युवक का दिल और किडनी पूरी तरह सामान्य काम कर रहे हैं। उसे आईसीयू से वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है और इसी हफ्ते डिस्चार्ज किया जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि सल्फास के मामलों में शुरुआती 24 घंटे बेहद नाजुक होते हैं; सही समय पर बड़े अस्पताल पहुंचने से जान बचाई जा सकती है।




