राज्य सरकार ने मध्य प्रदेश जल निगम मर्यादित (एमपीजेएनएम) का नाम बदलकर अब मध्य प्रदेश जल एवं स्वच्छता निगम (एमपी-वास्को) कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई संचालक मंडल की 26वीं बैठक में पीएचई विभाग के इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। अब यह निगम जल विकास और स्वच्छता प्रबंधन के क्षेत्र में नए लक्ष्यों के साथ काम करेगा।
बैठक में लिए गए प्रमुख फैसले इस प्रकार हैं:
- बढ़ी वित्तीय ताकत: निगम के प्रबंध संचालक (एमडी) के वित्तीय अधिकार बढ़ा दिए गए हैं। अब एमडी 5 करोड़ के बजाय सीधे 25 करोड़ रुपए तक के टेंडर मंजूर कर सकेंगे।
- पवन ऊर्जा परियोजना: कैप्टिव मोड के तहत 60 मेगावाट की ग्रिड-कनेक्टेड पवन ऊर्जा परियोजना के लिए प्रोजेक्ट कंपनी में 26 प्रतिशत इक्विटी शेयर रखने और एमडी को प्रतिनिधित्व देने का अनुमोदन किया गया।
- बजट और रिपोर्ट मंजूर: बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 57 करोड़ रुपए के बजट अनुमान और वर्ष 2023-24 के प्रतिवेदन व 2024-25 के अनअंकेक्षित वार्षिक लेखों को मंजूरी मिली।
- पुनर्नियुक्ति: संचालक मंडल में स्वतंत्र निदेशक के पद पर सुमित बोस की दोबारा नियुक्ति का भी अनुमोदन किया गया।
इस बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपत्तिया उइके, मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल और जल निगम के एमडी वीएस चौधरी कोलसानी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।




