भोपाल:
आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों का इलाज करने वाले निजी अस्पतालों के डॉक्टर बुधवार को सड़कों पर उतर आए। प्राइवेट हॉस्पिटल एसोसिएशन के बैनर तले डॉक्टरों ने जेपी हॉस्पिटल कैंपस स्थित आयुष्मान कार्यालय के बाहर जमकर नारेबाजी की। अस्पतालों का कहना है कि सरकार की ओर से पिछले 5-6 महीने से भुगतान नहीं किया गया है, जिसके चलते उन पर आर्थिक संकट गहरा गया है।
डेढ़ से दो करोड़ रुपए बकाया, स्टाफ को देना मुश्किल
एसोसिएशन के पदाधिकारियों के मुताबिक, भोपाल में कुल 468 प्राइवेट अस्पताल हैं, और प्रत्येक अस्पताल का औसतन डेढ़ से दो करोड़ रुपए का भुगतान अटका हुआ है। राशि न मिलने के कारण अस्पताल संचालकों के लिए दवा वेंडर्स और स्टाफ को समय पर सैलरी देना मुश्किल हो गया है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया, तो यह विरोध प्रदर्शन पूरे प्रदेश स्तर पर फैलाया जाएगा।
NABH की शर्त से छोटे अस्पतालों पर संकट
भुगतान के अलावा, स्वास्थ्य विभाग द्वारा थोपी जा रही एनएबीएच (NABH) की अनिवार्यता को लेकर भी टकराव बढ़ गया है। अस्पतालों का आरोप है कि 1 अक्टूबर से भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में बड़े पैमाने पर छोटे और मध्यम अस्पतालों का ‘डी-एम्पैनलमेंट’ (योजना से बाहर करना) करने की तैयारी है।
अस्पतालों का पक्ष है कि वे गुणवत्ता के विरोधी नहीं हैं, लेकिन एनएबीएच को अनिवार्य करने के बजाय स्वैच्छिक और प्रोत्साहन आधारित रखा जाना चाहिए। यदि अचानक छोटे अस्पतालों को योजना से बाहर किया गया, तो इसका सीधा असर गरीब और मध्यमवर्गीय मरीजों पर पड़ेगा, जो अपने घर के पास कैशलेस इलाज कराते हैं।
सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
अस्पताल संगठनों ने मांग की है कि सरकार इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करे और प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर व्यावहारिक रास्ता निकाले। यदि मांगें नहीं मानी गईं और बड़े पैमाने पर कार्रवाई हुई, तो प्रदेशभर के निजी अस्पताल सामूहिक रूप से कड़ा कदम उठाने के लिए बाध्य होंगे।



