Thursday, September 17, 2026
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भोपाल में गोवर्धन पूजन के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री का उद्बोधन

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पूरे मध्यप्रदेश के पर्यावरण प्रेमी आज इस कार्यक्रम से जुड़े हैं।

मैं आपको दीपावली और गोवर्धन पूजन के पावन पर्व पर हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ।

शहरों में तो गोवर्धन पूजा कम होती है लेकिन गाँव-गाँव में यह पूजा की जाती है।

आज का गोवर्धन उत्सव भले ही किसी को भी अजीब लगे लेकिन आज मैं आपको बताना चाहता हूँ कि अपना देश अद्भुत है।

हमारे देश का 5,000 साल का तो ज्ञात इतिहास है। हमारे ऋषियों ने सोच-समझकर परम्पराएँ बनाई हैं।

एक ही चेतना हम सभी में है, जिसे सामान्य शब्दों में तुलसी बाबा ने कहा – सिया राम मय सब जग जानी।

अगर आप गहराई में जाएंगे, तो अनंत आनंद में डूब जाएंगे। आज संयुक्त राष्ट्र वाले अलग-अलग गोल सेट कर रहे हैं लेकिन हमारे यहाँ तो हजारों साल पहले कह दिया गया था – वसुधैव कुटुंबकम, सारा विश्व हमारा परिवार है।

हमने तो हजारों साल पहले कह दिया था – सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःखभाग् भवेत्॥

आज जो समस्याओं के बारे में बताया गया, उसका समाधान क्या है?

हमारे किसी भी देवता की पूजा करो, तो वो किसी न किसी वाहन पर बैठ कर आएंगे। यह वाहन कोई मोटरगाड़ी नहीं होती, यह कोई न कोई जीव होता है। इसका तात्पर्य है इनको भी आत्म भाव से देखें। हमारे यहाँ पेड़ों की पूजा हजारों साल से होती है।

भारत ने हजारों साल पहले कहा कि प्रकृति का दोहन करो, शोषण मत करो। कन्हैया भी जानते थे कि गोवर्धन नहीं होगा, तो गौओं को चारा नहीं मिलेगा, ऑक्सीजन नहीं मिलेगी, औषधि नहीं मिलेंगी और जड़ी-बूटी नहीं मिलेंगी। इसलिए उन्होंने गोवर्धन पूजा करने को कहा।

प्राकृतिक असंतुलन के कारण अनेक समस्याएँ आज आ रही हैं। इसी लिए कहा गया है कि दोहन मत करो, शोषण करो।

नदियाँ हमारे यहाँ जलवाहिका नहीं मानीं गईं, हमने इन्हें माँ मानकर पूजा।

भौतिकता की अग्नि में दग्ध विश्व मानवता को शाश्वत शांति के पथ का दिग्दर्शन हमारा भारत दर्शन ही करवा सकता है।

गोवर्धन पूजा कोई कर्मकांड नहीं है। मेरे प्रदेशवासियों, गंभीर चिंतन के लिए यह कार्यक्रम रखा गया है। हमें समस्या का समाधान ढूंढना है, आने वाली पीढ़ियों की चिंता करना है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने हमारे सामने पर्यावरण संरक्षण के लिए कई लक्ष्य रखे हैं। अगर धरती को बचाना है तो अपनी जीवन शैली में परिवर्तन लाना पड़ेगा।

कुछ न करो तो कम से कम अपने जन्मदिन पर एक पेड़ तो लगा दो। मुझे खुशी है कि मध्यप्रदेश में इस दिशा में प्रयास हो रहे हैं।

आज गाँव-गाँव में जाओ, तो लोग पानी की बोतल सामने रख देते हैं। लोग पानी दो घूंट पानी पीते हैं और बाकी फेंक देते हैं। हम जितना पानी पीयें, उतना ही लें।

बिजली की सब्सिडी देने में सरकार के 24,000 करोड़ रुपये खर्च हो जाते हैं। यह आपका ही पैसा है, अगर सभी सोच लें कि जितनी बिजली चाहिए, उतनी ही जलाएंगे, तो लगभग 4,000 करोड़ रुपये हम बचा सकते हैं।

ऊर्जा संरक्षण के लिए अलग-अलग चीजें हैं। जीवन शैली में परिवर्तन करके कई काम हो सकते हैं।

मध्यप्रदेश में अब हम सौर ऊर्जा पर बल दे रहे हैं। ओंकारेश्वर में फ्लोटिंग सोलर पॉवर प्लांट लगा रहे हैं, अन्य जगहों पर सोलर पार्क बन रहे हैं, जिससे धरती को सुरक्षित कर सकें।

गोवंश का सही उपयोग हमें करना होगा। गोवंश के संरक्षण के लिए हमने अनेक प्रयास प्रारंभ किए हैं।

ग्रीन सिटी इंडेक्स का शुभारंभ करने के लिए मैं विभाग को बधाई देता हूँ। हमारे शहरों में एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होगी, जिससे स्थिति सुधरेगी। हम प्रयास करेंगे कि मध्यप्रदेश ग्रीन सिटी इंडेक्स में भी प्रथम आए।

पहले हमारी खेती बैलों पर निर्भर होती थी, जब ट्रैक्टर आए और हार्वेस्टर आए, हमने बैलों को भगाना प्रारंभ कर दिया। जब जरूरत थी तब हमने उपयोग किया और जरूरत न होने पर भगा दिया।

मध्यप्रदेश में 1.87 करोड़ से ज्यादा गोवंश है। मैं सम्पूर्ण समाज से अपील करता हूँ कि हम गोवंश बचाने के लिए प्रयास करें।

मध्यप्रदेश में अभी 1,700 गौशालाएँ हैं, 1,404 पूरी हो गई हैं। 1,800 गौशाला हम बना रहे हैं। गोवर्धन योजना के तहत गैस और सीएनजी के निर्माण के लिए इंदौर में प्रयास चालू हो गया है। अगर ढंग से गौशाला चलाएँ तो गौशाला आत्मनिर्भर बन जाएंगी।

सरकार हर पंचायत में गौशाला घोषित करेगी। हम चारागाह विकसित करने का प्रयास करेंगे। हम हर शहर और हर पंचायत में ग्रीन कवर बढ़ाने हेतु पेड़ लगाने के लिए एक जगह सुनिश्चित और सुरक्षित करेंगे।

मैं आह्वान करना चाहता हूँ किसान बंधुओं से कि प्राकृतिक खेती पर भी ध्यान दें। हम खाद और कीटनाशक की पूरी व्यवस्था करेंगे लेकिन इससे जो जमीन की दुर्दशा होती है, इस पर भी विचार करें।

मध्यप्रदेश में 59,000 किसानों का पंजीयन प्राकृतिक खेती के लिए हुआ है। केमिकल फर्टिलाइजर हमारे खाद्य पदार्थों को जहरीला बना रहे हैं। इससे बीमारी बढ़ रही हैं, अगर आज ध्यान नहीं दिया, तो आने वाली पीढ़ियाँ इससे प्रभावित होंगी।

प्रधानमंत्री जी के ‘मिशन लाइफ’ को सफल बनाने में योगदान देने के लिए जनता से आग्रह करता हूँ।

हमारी जीडीपी ‘ग्रॉस एंवायरनमेंट प्रोडक्ट’ के बिना अधूरी है। मध्यप्रदेश सरकार ने इसी तारतम्य में ग्रीन इनिशियेटिव शुरू किया है।

आज हम पेड़ लगाने, बिजली बचाने, पानी बचाने, लकड़ी की जगह गोकाष्ठ का इस्तेमाल करने, प्राकृतिक खेती करने, गौग्रास के लिए कुछ न कुछ देने, फसलों की पराली न जलाने और सांस्कृतिक धरोहरों को सुरक्षित रखने का संकल्प लें।

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