Tuesday, October 20, 2026
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एमपी की मंत्री कृष्णा गौर के बेटे से साइबर फ्रॉड:लेबर सप्लाई का ठेका दिलाने 3 लाख जमा कराए

मध्य प्रदेश सरकार की मंत्री कृष्णा गौर के बेटे और पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बाबूलाल गौर के पोते के साथ ठगी का मामला सामने आया है। कृष्णा गौर के बेटे को साइबर ठगों ने लेबर सप्लाई का ठेका दिलाने के नाम पर 3 लाख 19 हजार रुपए की ठगी की है।

पूरे मामले में भोपाल साइबर क्राइम ब्रांच ने अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक आकाश गौर ने साइबर क्राइम को सूचना दी थी। इस मामले में साइबर क्राइम की टीम ने फर्जी ईमेल बनाकर बैंक खाते को अनहोल्ड करने के लिए मेल करने वाले आरोपी सैफ अली चाऊस को भोपाल से गिरफ्तार किया है।

बता दें कि सैफ ने साइबर क्राइम का फर्जी मेल आईडी बनाकर बैंक को मेल किया था। बैंक ने जब इस मामले में पुलिस से जानकारी ली गई तब इसका खुलासा हुआ। पुलिस ने बताया कि मामले की जांच में सामने आया कि जालसाज ने रकम पाने के लिए बैंक ऑफ इंडिया के एक खाते का इस्तेमाल किया।

शिकायत के बाद बैंक खाते को होल्ड कराने से पहले ही ठगी का पैसा एक अन्य सहकारी बैंक के खाते में ट्रांसफर कर लिया गया। बाद में साइबर क्राइम की टीम ने सहकारी बैंक के बारे में जानकारी जुटाकर खाते को फ्रीज कर दिया।

क्यूआर कोड पर एंट्री करो और काम अलॉट आकाश गौर ने अपनी शिकायत में बताया कि 20 मार्च 2024 को सुबह 11 से शाम 4 बजे के बीच उन्हें प्राइवेट कंपनी में लेबर सप्लाई के टेंडर के लिए फोन आया था। फोन करने वाले ने उनसे पूछा कि आप लेबर सप्लाई का काम करते हैं। आकाश ने इस पर बताया कि वह ठेकेदारी करते हैं। इस पर फोन करने वाले ने कहा कि उन्हें काम का टेंडर मिल जाएगा। इसके लिए क्यूआर कोड पर एक एंट्री करनी होगी और काम अलॉट हो जाएगा।

आकाश ने पुलिस को बताया कि फोन करने वाले ने खुद का नाम आरके यादव बताया और उसने कहा कि टेंडर पाने के लिए आपको जल्द ही वेंडर कोड जनरेट करना होगा और उसके लिए तय शुल्क जमा करने को कहा। थोड़ी देर बाद ही जालसाज ने उनके वॉट्सऐप पर एक क्यूआर कोड भेजकर उनसे शुल्क जमा करने के लिए कहा।

आकाश गौर उनके झांसे में आ गए और ठग के कहे मुताबिक 20 मार्च 2024 को अलग-अलग बैंक खातों से 3 लाख 19 हजार ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद जालसाज ने फोन बंद कर लिया।

साइबर पुलिस की तरह फर्जी मेल आईडी बनाई साइबर पुलिस ने बताया कि सैफ अली ने अपने बैंक खाते में राशि ट्रांसफर करने के बाद आरोपी राकेश यादव को कमीशन दे दिया। जांच के बाद मुंबई की बैंक ऑफ इंडिया शाखा और अपना सहकारी बैंक का खाता होल्ड कराया गया था। यह दोनों खाते सैफ अली ही इस्तेमाल करता है। आरोपी सैफ को अपना सहकारी बैंक से साइबर क्राइम भोपाल को भेजा गया नोटिस मिल गया था।

इसके बाद उसने साइबर क्राइम भोपाल की ईमेल आईडी dspcrimebho@mp.gov.in जैसी एक आईडी dspcrimebho@mpgovr.in तैयार की। नोटिस के विवरण में खाता खुलवाने के लिए बदलाव कर अपने सहकारी बैंक की ईमेल आईडी पर खाता खुलवाने के लिए मेल कर दिया। बैंक को मेल आईडी पर शक होने पर साइबर क्राइम भोपाल को सूचित किया गया था। जिसके बाद सैफ अली को पुलिस ने भोपाल से गिरफ्तार कर लिया।

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