विदिशा:
शहर में 4.90 करोड़ रुपए के निजी ठेके पर चल रही डोर-टू-डोर सफाई व्यवस्था वेतन न मिलने के कारण 5 दिन तक पूरी तरह ठप रही। ड्राइवरों और हेल्परों के काम बंद करने से शहर में कचरे के ढेर लग गए। इससे नाराज पार्षदों ने कंपनी कार्यालय के बाहर कचरा फेंककर जोरदार प्रदर्शन किया और ठेका रद्द करने की मांग की।
मुख्य बिंदु:
- वेतन न मिलने से हड़ताल: कंपनी के कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा था, जिसके चलते उन्होंने कचरा गाड़ियां चलाना बंद कर दिया था।
- अनियमित सेवाएं: वार्ड-34 के पार्षद प्रतिनिधि राजेश लोधी ने बताया कि जनता से सालाना 960 रुपए यूजर चार्ज वसूला जा रहा है, लेकिन कई इलाकों में 8 से 15 दिन तक कचरा गाड़ियां नहीं पहुंचतीं। शिकायत करने पर कंपनी के लोग फोन भी नहीं उठाते।
- नगर पालिका की दखल: कर्मचारियों के काम बंद करने के बाद नगर पालिका ने 26 और 27 सितंबर को अपने वाहन भेजकर कचरा उठवाया। बाद में कंपनी से चर्चा कर व्यवस्था को दोबारा शुरू कराया गया।
- ऑडिट आपत्तियों से रुका भुगतान: नगर पालिका अधिकारियों का कहना है कि ऑडिट आपत्तियों के कारण कंपनी का भुगतान अटका हुआ है, जिसे आपत्तियों का निराकरण होते ही जारी कर दिया जाएगा।
- पुरानी व्यवस्था को बेहतर बताया: नेता प्रतिपक्ष आशीष माहेश्वरी ने आरोप लगाया कि निजी ठेका मिलने के बाद से शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ गई है, जबकि पुरानी व्यवस्था इसके मुकाबले काफी बेहतर थी।



