ग्वालियर:
मध्य प्रदेश की चर्चित ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’ को लेकर हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में योजना को असंवैधानिक बताते हुए इसे बंद करने और महिलाओं को दी जा रही 1500 रुपये की मासिक किस्त पर रोक लगाने की मांग की गई है।
मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य शासन के महिला एवं बाल विकास विभाग को नोटिस जारी कर 4 हफ्ते में जवाब मांगा है।
याचिका में क्या है मुख्य तर्क?
- रोजगार की मांग: याचिकाकर्ता का कहना है कि नकद पैसे बांटने के बजाय महिलाओं को रोजगार और बच्चों को नौकरी के अवसर दिए जाने चाहिए, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें।
- वित्तीय भार: याचिका के मुताबिक, योजना पर हर साल 22,500 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हो रहे हैं और वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में इसके लिए 23,882 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
- निर्भरता का मुद्दा: तर्क दिया गया है कि बिना कौशल विकास या वोकेशनल ट्रेनिंग के सीधे पैसे देने से सरकारी सहायता पर निर्भरता बढ़ती है।
सरकार की आपत्ति और कोर्ट के निर्देश
सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से आपत्ति उठाई गई कि सवा करोड़ से अधिक महिला लाभार्थियों को याचिका में पक्षकार नहीं बनाया गया है। इस पर हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि शासन खुद लाभार्थियों की सूची अदालत में पेश करे और याचिका की कॉपी लाभार्थियों तक पहुंचाए। अब सरकार के जवाब के बाद ही मामले में आगे की सुनवाई होगी।




