मध्यप्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सेहत से खिलवाड़ करने वाली कंपनियों पर प्रशासन ने कड़ा शिकंजा कसा है। मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPPHCL) ने गुणवत्ता जांच में दवा फेल होने और अनुबंध की शर्तें तोड़ने पर तीन बड़ी कंपनियों को दो साल के लिए ब्लैकलिस्ट (डिबार) कर दिया है।
प्रमुख कार्रवाई के बिंदु:
- मिर्गी की दवा फेल: मेसर्स यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड द्वारा सप्लाई की गई Levetiracetam 250 mg टैबलेट (बैच नं. EV1TG004) सरकारी जांच में अमानक पाई गई। कॉर्पोरेशन ने कंपनी से सात दिन के भीतर 3.28 लाख रुपये जमा करने के निर्देश दिए हैं।
- कृमिनाशक की सप्लाई अधूरी: मेसर्स हीलर्स लैब (लखनऊ) को सरकारी अस्पतालों में Albendazole 400 mg टैबलेट की सप्लाई का ठेका दिया गया था, लेकिन तय समय पर पूरा सामान न पहुंचाने पर कंपनी पर कार्रवाई की गई है। इसके साथ ही ऑनलाइन ऑर्डर और दर अनुबंध रद्द कर सुरक्षा राशि जब्त कर ली गई है।
- फर्जी दस्तावेज का मामला: मेसर्स डिसेंट मेडिकल इक्विपमेंट सिस्टम (इंदौर) ने लैप्रोस्कोपी उपकरण के टेंडर में कथित तौर पर फर्जी Manufacturer Authorization Form (MAF) लगाया था। निर्माता कंपनी से पुष्टि होने पर फर्जीवाड़ा सामने आया, जिसके बाद कंपनी को डिबार कर P.B.G. (सुरक्षा राशि) जब्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन के इस कड़े रुख से दवा और उपकरण सप्लाई करने वाली अन्य एजेंसियों में हड़कंप मच गया है।




