‘’जब एक पुत्री का जन्म होता है तो यह इस बात का निश्चायक सबूत है, कि ईश्वर मानव जाति से अप्रसन्न नहीं है, क्योंकि ईश्वर पुत्रियों के माध्यम से स्वयं को साकार रूप देता है।‘’
कवि रविन्द्र नाथ टैगोर इन पंक्तियों को अपने फैसले में शामिल करते हुए भोपाल के 23वें अपर सत्र न्यायाधीश अतुल सक्सेना ने गुरुवार शाम मासूम बेटी की हत्यारी मां को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने 104 पेज के निर्णय में विशेष टिप्पणी दी है।
जिसमें कहा गया कि वर्तमान में पुत्रियां सभ्यता, सस्ंकृति व राष्ट्र निर्माण का सशक्त हस्ताक्षर हैं। शास्त्रों में पुत्रियों को हृदयों का बंधन, भावों का स्पंदन, सृजन का आधार, भक्ति का आकार और संस्कृति का संस्कार माना गया है। वर्तमान में भारत जैसे विकसित राष्ट्र में पुत्रियों को साहस, सृजन, सेवा, सभ्यता, सौंदर्य एवं शक्ति के पुंज के रूप मे देखा जा रहा है।
बता दें कि भोपाल के खजूरी इलाके में मां ने ही पानी की टंकी में डुबोकर एक महीने की मासूम बेटी की हत्या कर दी थी। घटना 16 सितंबर 2020 की है। आरोपी मां फिलहाल जेल में बंद है। केस में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक सुधा विजय सिंह भदौरिया ने पैरवी की थी।
मां को थी बेटे की आस, बेटी हुई तो नफरत हो गई
एक माह की किंजल मेवाड़ा ग्राम डहरिया थाना खजूरी निवासी सचिन मेवाड़ा की बेटी थी। सचिन गांव में खेती करता है और उसकी शादी करीब 14 माह पूर्व हुई। बुधवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे सचिन की एक माह की मासूम अचानक लापता हो गई। पत्नी से पूछने पर उसने कहा की बच्ची को प्रेत आत्माएं ले गई हैं। परिजनों ने तलाश शुरू की तो करीब चार बजे उसकी बॉडी प्लास्टिक के एक पानी के ड्रम में मिली।
ड्रम का ढक्कन बंद था। बच्ची को आखिरी बार मां के साथ कमरे में देखा गया था। जबकि सचिन की मां और अन्य परिजन अपने-अपने कमरों में थे। खजूरी थाने के तात्कालीन टीआई एलडी मिश्रा का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह साफ था कि बच्ची की हत्या की गई है। शक की सुई उसकी मां पर थी। जांच के बाद मां को गिरफ्तार किया था। उसने पूछताछ में मां सरिता बाई मेवाड़ा ने बताया था कि उसे लड़के की चाहत थी। लड़की पैदा होने पर उसे बच्ची से नफरत हो गई थी। इसी के चलते उसने बेटी की हत्या की।




