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फर्जी कॉल सेंटर मामला

ऐशबाग में पकड़े गए फर्जी कॉल सेंटर के आरोपियों को बचाने के लिए रिश्वत लेने के मामले में कोर्ट ने भाजपा पार्षद अंशुल जैन और प्रधान आरक्षक धर्मेंद्र की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। यह फैसला प्रथम जिला एवं सत्र न्यायाधीश राम प्रताप मिश्र की अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए सुनाया।

सरकारी पक्ष की ओर से लोक अभियोजक पीएन सिंह राजपूत ने पैरवी करते हुए जमानत का विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि यह मामला फर्जी कॉल सेंटर और उसमें शामिल आरोपियों को बचाने से जुड़ा है, इसलिए आरोपियों को जमानत का लाभ नहीं मिलना चाहिए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद शाम 4:30 बजे कोर्ट ने फैसला सुनाया।

रिश्वत लेने वाला एएसआई अब भी फरार

फर्जी कॉल सेंटर के आरोपियों को बचाने के लिए 4.94 लाख रुपये की रिश्वत लेने वाला एएसआई पवन रघुवंशी अब भी फरार है। इसके अलावा टीआई जितेंद्र गढ़वाल, एएसआई मनोज, प्रधान आरक्षक धर्मेंद्र सहित अन्य आरोपी भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। वहीं, कॉल सेंटर का संचालन करने वाला मुईन, उसकी पत्नी जायदा, भाई और डील की रकम लाने वाला पार्षद भी फरार हैं।

एसआईटी ने शुरू की जांच

एसआईटी प्रमुख एसीपी निहित उपाध्याय के नेतृत्व में इस मामले की जांच जारी है। टीम ने पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज करने शुरू कर दिए हैं और इसके लिए संबंधित लोगों को नोटिस भेजकर बुलाया जा रहा है। साथ ही, एक टीम आरोपी पवन रघुवंशी के घर और आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है, ताकि उसके ठिकाने का पता लगाया जा सके।

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