मध्य प्रदेश हज कमेटी के पदाधिकारियों से भोपाल के हज हाउस को पूरे वर्ष सक्रिय रूप से इस्तेमाल करने की मांग की है। भोपाल के सामाजिक कार्यकर्ता व हाजी मोहम्मद इमरान हारून ने यह सुझाव दिया है कि हज हाउस का उपयोग सिर्फ हज फॉर्म भरने और टीकाकरण तक सीमित न रखकर इसे वर्षभर हज व उमरा प्रशिक्षण केंद्र के रूप में चलाया जाए। फिलहाल, भोपाल का हज हाउस अधिकांश समय खाली पड़ा रहता है, जबकि हज यात्रियों को प्रशिक्षण देने के लिए विभिन्न अस्थायी कैंप आयोजित किए जाते हैं। इमरान हारून का कहना है कि ये कैंप पर्याप्त नहीं हैं और हज हाउस को स्थायी प्रशिक्षण केंद्र बनाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि यहां हर महीने हज और उमरा से जुड़ी जानकारी, दुआएं व अरकान की शिक्षा दी जानी चाहिए।
उमरा प्रशिक्षण पर जोर
मोहम्मद इमरान हारून ने बताया कि उमरा भी एक महत्वपूर्ण धार्मिक यात्रा है, जिसमें तवाफ, सई और दुआओं का विशेष महत्व होता है। अगर उमरा जाने वालों को भी यहां प्रशिक्षण दिया जाए, तो वे बेहतर ढंग से इसकी अदायगी कर पाएंगे। इसके अलावा, हज यात्रा पर जाने वालों को भी पूर्व प्रशिक्षण मिलने से वे अधिक सजगता से रीति-रिवाज पूरे कर सकेंगे। इमरान हारून ने महाराष्ट्र के मुंबई हज हाउस का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां IAS जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग चलाई जाती है, जिससे मुस्लिम समुदाय के युवाओं को लाभ मिलता है।
उन्होंने मांग की कि भोपाल के हज हाउस में भी इसी तरह शैक्षणिक और सामाजिक गतिविधियां संचालित की जाएं, ताकि यह भवन समुदाय के लिए अधिक उपयोगी साबित हो। उन्होंने मध्यप्रदेश हज कमेटी से अनुरोध किया कि इस विषय पर गंभीरता से विचार करते हुए हज हाउस को पूरे साल सक्रिय बनाया जाए। इससे न केवल हज यात्रियों को बेहतर मार्गदर्शन मिलेगा, बल्कि समाज के अन्य वर्गों को भी शिक्षा और प्रशिक्षण का लाभ मिल सकेगा।




