Friday, July 24, 2026
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नायब शहर काजी बोले-जेहाद मतलब जंग नहीं,अच्छाई के लिए संघर्ष

जहांगीराबाद स्थित इंडियन कॉफी हाउस में सोमवार को जागरूक मुस्लिम मंच द्वारा एक बेहद संवेदनशील विषय पर प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। “इस्लाम में बलात्कार: सज़ा या सवाब?” शीर्षक से आयोजित इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य था इस्लाम धर्म को बलात्कार जैसे जघन्य अपराध से जोड़ने की कोशिशों का पुरजोर खंडन करना और कुरान व हदीस के हवाले से सच्चाई सामने लाना।

प्रेसवार्ता में भोपाल और आसपास के प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरु, कानूनी विशेषज्ञ, महिला कार्यकर्ता और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी वक्ताओं ने एक सुर में इस्लामिक शिक्षाओं को गलत तरीके से पेश करने की आलोचना की और बलात्कार जैसे अपराधों को धर्म से जोड़ने की प्रवृत्ति को समाज विरोधी बताया।

मौलाना अली क़दर का बयान: “जेहाद को हथियार नहीं, इंसानियत बनाइए” नायब शहर काजी मौलाना अली क़दर ने कहा कि, “जेहाद शब्द का मतलब केवल युद्ध नहीं होता। जेहाद एक व्यापक अवधारणा है , जिसमें व्यक्ति खुद की बुराइयों, समाज की बुराइयों, और अन्याय के खिलाफ संघर्ष करता है। जब कोई अपने लालच, गुस्से और बुरी प्रवृत्तियों को नियंत्रित करता है। वही असली जेहाद है। जो लोग जेहाद को केवल तलवार और खून से जोड़ते हैं, वे इस्लाम की मूल भावना को नहीं समझते। उन्होंने कहा कि आज सोशल मीडिया और कुछ राजनीतिक ताकतें ‘लव जिहाद’ और ‘लैंड जिहाद’ जैसे शब्दों के ज़रिए समाज में ज़हर घोल रही हैं। “इन शब्दों का इस्लाम से कोई ताल्लुक नहीं है। कुरान और हदीस में इनका कोई जिक्र नहीं। ये गढ़े हुए जुमले हैं जिनका इस्तेमाल केवल मुस्लिम समाज को निशाना बनाने के लिए किया जाता है।

लालच या मोहब्बत के लिए इस्लाम कुबूल करना गलत मौलाना अली कदर ने यह भी स्पष्ट किया कि इस्लाम को अपनाने की एकमात्र शर्त है सच्ची नीयत और ईमानदारी। “अगर कोई व्यक्ति सिर्फ किसी लड़की से शादी करने या पैसों की लालच में इस्लाम अपनाता है, तो इस्लाम उसे स्वीकार नहीं करता। इस्लाम की बुनियाद सच्चाई पर टिकी है, स्वार्थ पर नहीं। उन्होंने कुरान की आयतों का हवाला देते हुए कहा कि अल्लाह के नबी ने फरमाया “अगर कोई हिजरत भी किसी दुनियावी लाभ के लिए करता है, तो उसका अमल कबूल नहीं किया जाएगा।

इसी तरह लालच और मोहब्बत के लिए धर्म बदलना भी नापसंद किया गया है। मौलाना ने मीडिया से सवाल करते हुए कहा, “क्या आपने कभी कोई प्रमाण देखा है कि किसी मदरसे या मस्जिद से अपील की गई हो कि हिंदू लड़कियों को बहकाओ? एक भी वीडियो नहीं मिलेगा। लेकिन इसके उलट कई वीडियो सामने आए हैं जिनमें मुस्लिम लड़कियों को निशाना बनाया जाने की बात कही जाती हैं। हमें अपराध को धर्म से नहीं, इंसानियत के नजरिए से देखना होगा।

कार्यक्रम का उद्देश्य: नफरत नहीं, संवाद

प्रेस कॉन्फ्रेंस के संयोजक और ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के अध्यक्ष दानिश खान ने कहा कि इस संवाद का उद्देश्य किसी के खिलाफ बोलना नहीं, बल्कि समाज में फैलाई जा रही गलतफहमियों को तथ्यों से दूर करना है। उन्होंने कहा कि, “अब समय आ गया है कि मुस्लिम समाज खुद सामने आकर अपनी बात रखे और संवाद की प्रक्रिया को मजबूती दे। एडवोकेट आबिद मोहम्मद खान ने कहा कि शरीअत में बलात्कार की कड़ी सजा है और ऐसा कोई व्यक्ति इस्लाम का प्रतिनिधि नहीं हो सकता।

किसी को किसी भी रूप में धोखा दिया, वह हम में से नहीं

मुस्लिम महासभा के प्रदेश अध्यक्ष सैयद मुनव्वर अली ने कहा इस्लाम किसी भी धोखेबाज या अपराधी को अपनी छांव में नहीं रखता। उन्होंने कहा, “पैगंबर मोहम्मद साहब ने फरमाया है कि जिसने किसी को किसी भी रूप में धोखा दिया, वह हम में से नहीं है। यानी वह इस्लाम की सच्ची राह पर नहीं है, चाहे वह खुद को मुसलमान कहे या नहीं। उन्होंने बलात्कार जैसे अपराधों को लेकर समाज में फैलते दोहरे रवैये पर तीखी टिप्पणी की। “अगर किसी मुसलमान ने कोई गलत काम किया है, तो मुस्लिम समाज कभी उसके साथ नहीं खड़ा हुआ। ना तो कभी बलात्कारी का स्वागत किया, न फूल-मालाएं पहनाईं, न उसकी जय-जयकार की। लेकिन दुर्भाग्य से देश के कुछ हिस्सों में जैसे गुजरात और कठुआ मामलों में ऐसे अपराधियों का सार्वजनिक अभिनंदन किया गया, उन्हें नायक की तरह पेश किया गया।”मुनव्वर अली ने कहा, कि हमने हमेशा गुनहगार को गुनहगार माना है, चाहे वह अपने ही समाज का क्यों न हो।

भोपाल शहर काजी बोले- इस्लाम में ऐसे दरिंदों की कोई जगह नहीं

इससे पहले हिंदू छात्राओं से रेप और ब्लैकमेलिंग मामले में शहर काजी मुफ्ती मुश्ताक अली नदवी ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा कि इस्लाम में ‘जिना’ यानी बलात्कार जैसे अपराध के लिए बेहद सख्त सजा का प्रावधान है। जिसमें दोषी को सार्वजनिक रूप से पत्थर मार-मार कर मौत की सजा दी जाती है या 100 कोड़े मारे जाते हैं। काजी ने साफ कहा कि इस्लाम में ऐसे दरिंदों की कोई जगह नहीं है और सरकार को ऐसे आरोपियों पर रहम नहीं, सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। बता दें कि ‘जिना” एक इस्लामी कानूनी शब्द है। जिसका मतलब है नाजायज यौन संबंध। ऐसा यौन संबंध जो इस्लामी शरीयत के अनुसार वैध (निकाह के तहत) नहीं है। काजी नदवी ने कहा, “इस्लाम में रेप को सबसे गंभीर अपराधों में गिना गया है। शरीयत के मुताबिक, अगर कोई शादीशुदा व्यक्ति ऐसा गुनाह करता है तो उसे सार्वजनिक रूप से पत्थर मार-मार कर मौत की सजा दी जाती है। अगर वह अविवाहित है तो उसे 100 कोड़े लगाए जाते हैं।

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