भोपाल के संभावना ट्रस्ट क्लिनिक को 1 जनवरी से बंद करने का निर्णय लिया गया है। ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारी और गैस पीड़ितों ने सोमवार को यह जानकारी दी। यदि क्लिनिक बंद होता है तो करीब 37 हजार गैस पीड़ितों को इलाज नहीं मिल सकेगा। ट्रस्ट ने फंड की कमी का हवाला देते हुए क्लिनिक बंद करने की घोषणा की है। बताया जा रहा है कि एफसीआरए (फॉरेन कॉन्ट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट) के रिन्युअल की फाइल अटकने से ट्रस्ट को विदेशी फंड नहीं मिल रहा है।
ट्रस्ट के जुड़े लोगों का कहना है कि फाइल फरवरी-23 से गृह मंत्रालय के एफसीआरए विंग के विदेशी प्रभाग के पास पेंडिंग है। ट्रस्ट का 2 मई 2001 को रजिस्ट्रेशन हुआ था, लेकिन इसे अक्टूबर-19 में गलत तरीके से रद्द कर दिया गया था। पुनर्विचार के लिए कई बार लेटर लिखे गए, लेकिन उन्हें नजर अंदाज कर दिया गया। इस कारण विदेशी फंड नहीं मिल पा रहा है और ट्रस्ट की आर्थिक स्थिति गड़बड़ा गई है।

37 हजार गैस पीड़ित रजिस्टर्ड ट्रस्ट के क्लिनिक में कुल 51 कर्मचारी कार्यरत हैं। वर्तमान में 80 से 100 मरीज रोज क्लिनिक पर आते हैं। पैसों की कमी की वजह से डॉक्टर और कर्मचारियों की संख्या में कटौती की गई है। क्लिनिक में कुल 37 हजार गैस पीड़ित रजिस्टर्ड हैं।
फंड के लिए क्लिनिक परिसर में धरना देंगे हाल ही में गठित यूनियन कार्बाइड जहर पीड़ित इलाज अधिकार मोर्चा के सदस्यों ने क्लिनिक को खुला रखने के लिए लाभार्थियों और कर्मचारियों के साथ शांतिपूर्ण अभियान शुरू करने की घोषणा की है। इलाज अधिकार मोर्चा 1 जनवरी से क्लिनिक परिसर में धरना देगा। ट्रस्ट पिछले 28 साल से यूनियन कार्बाइड हादसे के पीड़ितों को मुफ्त और विशेष इलाज दे रहा है।
क्लिनिक बंद होने से यह नुकसान संभावना ट्रस्ट के सलाहकार डॉ. सतीनाथ षड़ंगी ने बताया, संभावना क्लिनिक आयुर्वेद और योग विधियों के साथ आधुनिक तरीके से इलाज करता है। यह विशेष इलाज मिथाइल आइसो-साइनाइट और यूनियन कार्बाइड के अन्य जहर पर प्रभावी पाया गया है। क्लिनिक बंद होने से रोगियों की सेहत पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। गैस पीड़ित नाथूराम सोनी ने क्लिनिक बंद नहीं करने की मांग की है। वहीं, बानो बी ने कहा कि, क्लिनिक के खास इलाज की वजह से ही मैं यूनियन कार्बाइड द्वारा दी गई कई बीमारियों के बावजूद चल-फिर रही हूं।




