Monday, April 20, 2026
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नेशनल हेराल्ड जमीन घोटाले में नया मोड़

नेशनल हेराल्ड की जमीन से जुड़े चर्चित घोटाले में नया मोड़ आया है। इस मामले में आरोपी और एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) के पावर ऑफ अटॉर्नी होल्डर नरेंद्र कुमार मित्तल को भोपाल की न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी हर्षा परमार की अदालत ने फरार घोषित करते हुए स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है। इसके साथ ही थाना प्रभारी को हर महीने प्रगति प्रतिवेदन (प्रोग्रेस रिपोर्ट) देने के निर्देश दिए गए हैं। अदालत ने आरोपी की संपत्तियों को कुर्क करने की कार्रवाई भी तत्काल शुरू करने का आदेश दिया है।

2008 में दर्ज हुआ था मामला, अब जाकर कार्रवाई हुई तेज

यह मामला साल 2008 में एमपी नगर थाने में दर्ज हुआ था, जिसमें नरेंद्र कुमार मित्तल और हरमहेंद्र सिंह बग्गा पर नेशनल हेराल्ड की जमीन के अवैध लेन-देन और अमानत में खयानत का आरोप है। शिकायतकर्ता मोहम्मद सईद और संजय चतुर्वेदी ने इस मामले की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। दिलचस्प यह रहा कि एफआईआर की दूसरी वर्षगांठ पर थाने में “केक काटकर” मामला खत्म करने की कोशिश की गई और पुलिस ने खात्मा रिपोर्ट अदालत में पेश कर दी थी।

अदालत ने खारिज की पुलिस की खात्मा रिपोर्ट

शिकायतकर्ता मोहम्मद सईद ने अदालत में खात्मा रिपोर्ट को चुनौती दी। इसके बाद 2014 में अदालत ने आरोपियों के खिलाफ धारा बदलते हुए चोरी की जगह अमानत में खयानत के तहत मामला दर्ज कर वारंट जारी कर दिए थे। इस दौरान हरमहेंद्र सिंह बग्गा हाईकोर्ट तक जमानत की कोशिश में गया और केस की फाइल तक रहस्यमयी तरीके से अदालत से गायब हो गई। इसका फायदा उसे मिला और वह मामले से अलग हो गया।

मित्तल की जमानत निरस्त, अब संपत्ति कुर्की की कार्रवाई

नरेंद्र कुमार मित्तल की जमानत, बग्गा के भाई राजेश बग्गा द्वारा ली गई थी, जिसे बाद में अदालत ने निरस्त कर दिया और गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया गया। अब अदालत ने उन्हें दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 299 के तहत फरार घोषित कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि निकट भविष्य में आरोपी के मिलने की कोई संभावना नहीं है। इसके साथ ही धारा 82 व 83 के तहत कुर्की की प्रक्रिया प्रारंभ करने के आदेश दिए गए हैं।

बीडीए ने जमीन का आवंटन रद्द किया

नेशनल हेराल्ड प्रकाशन की कंपनी एजेएल द्वारा मित्तल को पावर ऑफ अटॉर्नी पर दी गई जमीन को मित्तल ने कथित तौर पर अवैध रूप से बेच दिया था। इस पर भोपाल विकास प्राधिकरण (BDA) ने उक्त जमीन का आवंटन रद्द कर दिया है। जमीन को पुनः अपने कब्जे में लेने के लिए बीडीए ने जिला अदालत में मुकदमा दायर कर रखा है, जो विचाराधीन है।

पीड़ित बोले – जो लड़ाई नेशनल हेराल्ड को लड़नी थी, हमें लड़नी पड़ी

शिकायतकर्ता मोहम्मद सईद और संजय चतुर्वेदी ने अदालत के फैसले पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा, “यह लड़ाई हमें लड़नी पड़ी, जो मूलतः नेशनल हेराल्ड को लड़नी चाहिए थी।” उन्होंने उम्मीद जताई कि न्यायिक प्रक्रिया में अब तेजी आएगी और दोषियों को सजा मिलेगी।

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